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जिन्हें इधर-उधर ढूंढ रहे हो वह आपकी अंतरात्मा में विद्यमान है अगर झांकना है ढूंढना है तो अपने अंदर ढूंढो श्री महंत कमलेशानन्द सरस्वती महाराज हरिद्वार

हरिद्वार ( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद) खड़खड़ी स्थित प्रसिद्ध श्री गंगा भक्ति आश्रम में अपने श्रीमुख से ज्ञान का प्रवाह करते हुए श्री महंत परम पूज्य प्रातः स्मरणीय तपस्वी ज्ञान मूर्ति कमलेशनन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा जिस परमात्मा को मनुष्य इधर-उधर ढूंढता रहता है जिस परमात्मा को भजन सत्संग अध्यात्म पूजा पाठ यज्ञ अनुष्ठान के माध्यम से आराधना के माध्यम से इधर-उधर ढूंढ रहा है वह ईश्वर उसी की अंतरात्मा बनकर उसी के अंदर विद्यमान है अगर आवश्यकता है तो अपने अंतर मन में झांकने की अपने अंतर मन को निर्मल कर लेने की जिसके मन में एकाग्रता शांति और निर्मलता धारण हो उसके हृदय में सदैव ईश्वर का वास होता है हम ताउम्र ईश्वर को इधर-उधर झांकते हैं ढूंढते हैं किंतु वह हमारी अंतर आत्मा में हमारे हृदय में साक्षात विद्यमान है पुकारो तो सही सच्ची आस्था अपने अंदर लाओ वह आपको हर मनुष्य में हर जीव में खुद दिखाई देने लगेंगे अगर आवश्यकता है तो दुर्लभ जीवों पर दया की और नर सेवा ही नारायण सेवा के भाव की और सच्चे मन से कुछ पल हरि भजन की

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