भजन रूपी निधि ही मानव जीवन की सच्ची संपत्ति : श्री महंत सूरज दास महाराज हरिद्वार

हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। भूपतवाला स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर सीताराम धाम में आयोजित सत्संग के दौरान आश्रम के श्री महंत श्री सूरज दास महाराज ने भक्तजनों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का भजन ऐसी कल्याणकारी निधि है, जिसे न कोई छीन सकता है और न ही कोई बाँट सकता है। सांसारिक धन-संपत्ति समय, परिस्थिति अथवा अन्य कारणों से नष्ट हो सकती है, उस पर किसी का अधिकार भी हो सकता है, किंतु प्रभु-भक्ति और अर्जित आध्यात्मिक ज्ञान मनुष्य की ऐसी अमूल्य पूंजी है, जो सदैव उसके साथ रहती है।उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का स्मरण और नाम-संकीर्तन मनुष्य के जीवन को पवित्र, सफल और सार्थक बनाता है। भक्ति ही वह दिव्य मार्ग है, जो मनुष्य को मोह-माया से मुक्त कर परम शांति एवं ईश्वर की कृपा का अधिकारी बनाती है श्री महंत सूरज दास महाराज ने कहा कि “राम नाम से बढ़कर इस संसार में कोई धन नहीं।” जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में प्रभु का भजन और सद्गुरु की कृपा प्राप्त कर ली, उसने वास्तविक अर्थों में अमूल्य निधि अर्जित कर ली। यह ऐसी आध्यात्मिक संपदा है, जिस पर किसी प्रकार का विभाजन या अधिकार संभव नहीं है। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई उद्धृत करते हुए कहा— “कलियुग केवल नाम अधारा।
सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा॥” र्था कलियुग में केवल भगवान के नाम का ही सहारा है। प्रभु के नाम का निरंतर स्मरण करने वाला मनुष्य भवसागर से पार हो जाता है।सत्संग के अंत में श्रीराम एवं हनुमानजी के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में गूंज उठा तथा उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रभु-भक्ति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।




