राम नाम की नैया ही भवसागर पार लगाती है : श्री महंत रघुवीर दास महाराज हरिद्वार

हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद। हरिद्वार स्थित श्री सुदर्शन आश्रम अखाड़े में आयोजित भव्य सत्संग एवं धर्मसभा में परम पूज्य श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने अपने ओजस्वी एवं अमृतमयी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का नाम ही वह दिव्य नैया है, जो जीव को जन्म-मरण रूपी भवसागर से पार कराने में समर्थ है। राम केवल अयोध्या के राजा नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के आधार, सनातन धर्म के प्राण तथा प्रत्येक जीव के अंतःकरण में विद्यमान परम चेतना हैं।अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम मनुष्य के रोम-रोम में, प्रत्येक श्वास में और प्रत्येक जीव के हृदय में विराजमान हैं। समस्त चराचर जगत उन्हीं की सत्ता से प्रकाशित है। आदि से अनादि तक “राम” नाम ही ऐसा परम मंगलकारी मंत्र है, जो मनुष्य के जीवन को पवित्र, सफल और मोक्ष का अधिकारी बनाता है। जिस हृदय में राम बसते हैं, वहां भय, मोह, अहंकार और अज्ञान का अंधकार स्वतः समाप्त हो जाता है।उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी राम नाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा ह”कलियुग केवल नाम अधारा।सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा॥”अर्थात कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण ही मनुष्य के उद्धार का सबसे सरल और सर्वोत्तम साधन है।श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने आगे कहा कि भगवान श्रीराम सत्य, मर्यादा, करुणा, सेवा, त्याग और धर्म के साक्षात स्वरूप हैं। उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने वाला व्यक्ति स्वयं भी समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। राम भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक प्राणी में ईश्वर का दर्शन कर प्रेम, सेवा, सदाचार और परोपकार का भाव जागृत करना ही सच्ची राम आराधना है। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य की प्रत्येक श्वास में राम का स्मरण और प्रत्येक कर्म में धर्म का पालन नहीं होगा, तब तक जीवन में वास्तविक शांति और आनंद की प्राप्ति नहीं हो सकती। राम नाम का निरंतर जप मन, वचन और कर्म को पवित्र बनाता है तथा मनुष्य को ईश्वर के दिव्य सान्निध्य का अनुभव कराता है।कार्यक्रम के अंत में आश्रम में उपस्थित संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्रीराम नाम का संकीर्तन किया। संपूर्ण आश्रम परिसर “जय श्रीराम” के गगनभेदी उद्घोष, भजन-कीर्तन और भक्तिरस से सराबोर हो उठा। सभी ने विश्व शांति, राष्ट्र की उन्नति, सनातन संस्कृति के संरक्षण तथा समस्त मानवता के कल्याण की मंगलकामना की


