चुप तथा गंभीर मुद्रा में रहने वाले लोग अपने आराध्य की भक्ति में मन ही मन खोये रहते हैं हरिद्वार 15 अक्टूबर 2025

हरिद्वार 15 अक्टूबर 2025( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानन्द ) दक्ष रोड कनखल स्थित श्री माधव आश्रम श्री श्री आनंदमयी कविता मां आश्रम में भक्तजनों के बीच ज्ञान की वर्षा करते हुए ज्ञान मणि परम तपस्विनी श्री श्री आनंदमयी साधना मां ने कहा चुप रहने वाले अथवा गंभीर मुद्रा में रहने वाले लोग अपने आराध्य जैसे कि भगवान हरि भगवान भोलेनाथ भगवान संकट मोचन कृपा निधान वीर बजरंगबली हनुमान माता महाकाली मां दुर्गा मां शेरावाली आदि के ध्यान में खोये रहते हैं वह मन ही मन अपने आराध्य से बातें करते रहते हैं उनकी आराधना में लीन रहते हैं आम सांसारिक बातों से उन्हें कोई खासा लेना-देना नहीं होता मन ही मन उनकी भक्ति माला भजी जाती है इसीलिये एक साधक अपने आराध्य की आराधना के वसीभूत होता है अगर वह गंभीर मुद्रा में नहीं रहेगा अनर्गल बातों में ध्यान देगा तो उसकी आराधना से वह पीछे रह जायेगा जिस प्रकार एक व्यापारी को अपने व्यापार का मोह होता है इसी प्रकार एक आराधना मे लीन संत सन्यासी भक्त आराधक को अपनी ईश्वर की भक्ति का मोह होता है और यही बात उसे सबसे अलग बनाती है उसके मुख मंडल पर चेतना उसका शांत चित् उसका एकांत मन ही उसे उसके आराध्या तक पहुंचाता है आम सांसारिक बातों से सांसारिक मोह माया रिश्तो से उसका कोई बंधन या मोह नहीं रहता क्योंकि जो बंधन में बंधा है जिसके अंदर मोह है जिसके अंदर कुछ खो देने कुछ पा लेने की लालसा है वह भगवान तक कैसे पहुंच सकता है भगवान तक पहुंचाने के लियें इंसान को खुद खोना पड़ता है वैराग्य के आधीन होना पड़ता है ना उसे सर्दी की चिंता है ना उसे गर्मी की चिंता है ना उसे धूप का पता है और ना उसे छांव का पता है सांसारिक सुखों से उसका कोई लेना-देना नहीं होता वही वैराग्य को प्राप्त होता है और वही भगवान तक पहुंच सकता है जिसमें तनिक लेस मात्र भी किसी चीज की किसी को पाने की लालसा है किसी को खोने का गम है वह भगवान का नहीं हो सकता जो अपने पराये का भेद भुल जाता है और जिसका एक ही लक्ष्य है भगवान तक पहुंचाना वही भगवान हरि की शरणागत हो पता है और वही हरि को प्यारा है हरि उसके हैं और वह हरि का है



