श्री श्याम वैकुंठ धाम दिव्य लोक की अनुभूति कराने वाला आध्यात्मिक तीर्थ है : महंत श्यामसुंदर महाराज हरिद्वार,

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। श्यामपुर स्थित श्री श्याम वैकुंठ धाम में आयोजित दिव्य सत्संग के दौरान प्रातः स्मरणीय परमात्मा स्वरूप श्री महंत श्यामसुंदर जी महाराज ने भक्तजनों को संबोधित करते हुए कहा कि वैकुंठ धाम भगवान श्रीहरि विष्णु का परम दिव्य एवं सनातन लोक है, जिसका वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण, विष्णु पुराण, पद्म पुराण तथा अन्य वैष्णव ग्रंथों में अत्यंत श्रद्धा और महिमा के साथ किया गया है। यह वह दिव्य धाम है जहाँ जन्म-मृत्यु, दुःख, भय और मोह का कोई स्थान नहीं है तथा जहाँ भगवान श्रीविष्णु माता लक्ष्मी के साथ भक्तों को परम शांति और मोक्ष का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।इस अवसर पर श्री महंत श्यामसुंदर जी महाराज ने कहा कि शास्त्रों में वर्णित श्री वैकुंठ धाम की दिव्य महिमा से प्रेरणा लेकर ही भक्तों के आध्यात्मिक कल्याण और ईश्वर-भक्ति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से श्री श्याम वैकुंठ धाम का निर्माण कराया गया है। यहाँ की प्रत्येक रचना, मंदिर की आध्यात्मिक संरचना तथा दिव्य वातावरण श्रद्धालुओं को वैकुंठ की पावन अनुभूति कराने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य सच्ची श्रद्धा, निष्काम भक्ति और भगवान श्रीहरि के नाम का निरंतर स्मरण करता है, तब उसके जीवन का अज्ञान दूर होकर आत्मा परम आनंद की ओर अग्रसर होती है।महंत श्री ने कहा कि सनातन धर्म के शास्त्र बताते हैं कि भगवान श्रीविष्णु के चरणों में समर्पित जीवन ही वास्तविक वैभव है। सांसारिक सुख क्षणभंगुर हैं, जबकि भगवान की भक्ति से प्राप्तआध्यात्मिक आनंद शाश्वत है। श्री श्याम वैकुंठ धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा, सत्संग और सनातन संस्कृति के संरक्षण का दिव्य केंद्र है, जहाँ आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और प्रभु की कृपा का अनुभव करता है।उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में धर्म, सत्य, करुणा, सेवा और भगवान विष्णु के नाम-स्मरण को अपनाकर अपने जीवन को सफल बनाएं। प्रभु की भक्ति ही मनुष्य को समस्त बंधनों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करती है।शास्त्रोक्त स्तुति : शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्।विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥लक्ष्मीकान्तं कमलनयनंयोगिभिर्ध्यानगम्यम्।वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥अंत में महंत श्यामसुंदर जी महाराज ने कहा कि “जो श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान श्रीहरि का स्मरण करता है, सेवा, सत्संग और सदाचार को अपने जीवन का आधार बनाता है, उसके लिए प्रभु का वैकुंठ दूर नहीं रहता। श्री श्याम वैकुंठ धाम का उद्देश्य प्रत्येक भक्त के हृदय में उसी दिव्य वैकुंठ का प्रकाश जागृत करना है, जहाँ प्रेम, शांति, भक्ति और भगवान का अनंत सान्निध्य ही जीवन का परम लक्ष्य बन जाता है।” इस अवसर पर बोलते हुए राम निकेतन के महंत प्रातः स्मरणीय ज्ञानानंद जी महाराज ने शास्त्रों में वर्णित तथ्यों के आधार पर निर्मित श्री श्याम वैकुंठ धाम, इस पृथ्वी लोक का साक्षात वैकुंठ है जो, भगवान श्री हरि का सिमरन करते हुए इस पावन दिव्या तीर्थ श्री श्याम वैकुंठ धाम, की देवभूमि पर पधार कर यहां दर्शन करता है तथा संत महापुरुषों के ज्ञान की गंगा में गोते लगाता है उसका मानव जीवन धन्य तथा सार्थक हो जाता है तथा वह अपने इस लोक के जीवन को तो सुधर ही लेता है साथ-साथ परलोक को भी सुधार लेता है इस अवसर पर श्याम बैकुंठ धाम के निर्माण के वास्तुकार श्री अनिल भूटन अंतर्राष्ट्रीय भजन सिंगर भावना सर्वांजलि श्री प्रदीप सिंघल विजय भूटन राजेश अग्रवाल लखनऊ अशोक त्यागी आशीष जी गोपाल गर्ग रितेश शर्मा अरविंद जी डॉक्टर विजय मिश्रा लवकुश शुक्ला हरिशंकर तिवारी अशोक तिवारी राकेश अग्रवाल निलेश जी सहित भारी संख्या में भक्तगण इस अवसर पर उपस्थित थे



