नौमी डेरा धाम कांगड़ी तपोमूर्ति संतों की धरोहर स्थली के साथ-साथ कल्याण का मार्ग प्रदर्शित करने का उचित माध्यमआचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज हरिद्वार
हरिद्वार 21 मार्च 2026 वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंदहरिद्वार की पावन, मोक्षदायिनी एवं तपोभूमि कांगड़ी की पवित्र धरा पर स्थित नौमी डेरा धाम के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण समारोह गुरु भगवान पूज्य दयाचंद दास जी महाराज की पावन कृपा स्वरूप अद्भुत भव्यता, दिव्यता, श्रद्धा और अपार हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। यह अवसर केवल एक भवन के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सनातन संस्कृति, अध्यात्म, सेवा और साधना की जीवंत परंपरा के पुनः जागरण का प्रतीक बन गया। इस पावन क्षण ने यह संदेश दिया कि जब संत समाज का आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त होता है, तब कोई भी स्थान केवल भौतिक संरचना न रहकर आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन जाता है। इस दिव्य आयोजन में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर परम पूज्य स्वामी अवधेशानंद जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक चेतना से आलोकित कर दिया। उनके श्रीमुख से निकले पावन एवं अमृतमयी वचनों ने जनसमूह के हृदय को स्पर्श किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि “धर्म केवल आचरण का विषय नहीं, अपितु जीवन जीने की एक पवित्र कला है।
जब मनुष्य अपने जीवन में सेवा, साधना और संस्कारों को स्थान देता है, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है।” उन्होंने आगे कहा कि यह धाम केवल एक भवन नहीं, बल्कि साधकों के लिए आत्मिक उन्नति का द्वार है, जहाँ से प्रत्येक व्यक्ति सत्य, शांति और आत्मज्ञान की ओर अग्रसर हो सकता है। उनके वचनों ने उपस्थित जनसमूह को यह अनुभूति कराई कि आध्यात्मिक मार्ग ही जीवन की वास्तविक पूर्णता का मार्ग है। नवमी डेरा धाम तपोमूर्ति संतों की धरोहर स्थल है इस शुभ अवसर पर जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय सभापति परम पूज्य श्री प्रेम गिरि जी महाराज के पावन सानिध्य ने समारोह की गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान की। अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “संत समाज का कर्तव्य केवल प्रवचन देना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाना और उसे संस्कारों से जोड़कर रखना है।” उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे धाम समाज में एकता, प्रेम, सद्भाव और सेवा की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
उनके वचनों में समाज के प्रति गहरी संवेदना और राष्ट्र के उत्थान का संकल्प स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि वे धर्म के मार्ग पर चलकर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाएं और समाज के कल्याण में योगदान दें।नौमी डेरा धाम आश्रम के पूज्य श्री महंत प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान रामवीर दास जी महाराज ने भी अपने श्रीमुख से अत्यंत भावपूर्ण और प्रेरणादायक वचन प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि “नौमी डेरा धाम का यह नवनिर्मित भवन केवल ईंट-पत्थरों का समूह नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और साधना की शक्ति का साकार रूप है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह धाम आने वाले समय में हजारों-लाखों श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ज्ञान, शांति और सेवा का केंद्र बनेगा। उनके वचनों में अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, संत परंपरा के प्रति समर्पण और समाज के प्रति सेवा भाव स्पष्ट रूप से झलकता रहा। इस अवसर पर विभिन्न आश्रमों, मठों और मंदिरों से पधारे संत-महापुरुषों की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन को एक दिव्य महाकुंभ का स्वरूप प्रदान कर दिया। चारों ओर भक्ति, श्रद्धा, मंत्रोच्चार और संतों के आशीर्वचनों की गूंज से वातावरण पूर्णतः पावन और अलौकिक बन गया। श्रद्धालुओं के हृदय में अपार श्रद्धा और उत्साह का संचार हुआ, मानो यह क्षण उनके जीवन का एक अमूल्य और अविस्मरणीय अनुभव बन गया हो। समारोह के दौरान यह अनुभूति बार-बार हुई कि जब धर्म, साधना और सेवा का संगम होता है, तब समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानव जीवन को एक नई दिशा प्राप्त होती है। नवमी डेरा धाम का यह नवनिर्मित भवन आने वाली पीढ़ियों के लिए धर्म, संस्कृति और अध्यात्म का एक उज्ज्वल प्रकाशस्तंभ सिद्ध होगा, जहाँ से ज्ञान, सेवा और संस्कारों की अविरल धारा प्रवाहित होती रहेगी। अंततः यह लोकार्पण समारोह न केवल एक ऐतिहासिक और स्मरणीय आयोजन के रूप में अंकित हुआ, बल्कि इसने यह भी सिद्ध कर दिया कि संतों के सानिध्य में किया गया प्रत्येक कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनता है। यह आयोजन हर श्रद्धालु के हृदय में भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना की ज्योति प्रज्वलित कर गया, जो सदैव मार्गदर्शन करती रहेगी और मानव जीवन को श्रेष्ठता की ओर अग्रसर करती रहेगी। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर प्रातः स्मरणीय श्री संजय गिरी जी महाराज ने कहा जो भक्त गुरु के बताए मार्ग पर चलते हैं उनके मानव जीवन का उद्धार हो जाता है
गुरु इस पृथ्वी लोक पर साक्षात परमात्मा का स्वरूप है जो कल्याण और मुक्ति दोनों का मार्ग दिखाते हैं गुरु चरणों से होकर जाने वाला मार्ग सीधे भगवान श्री हरि तक पहुंचता है इसलिए अपने गुरु के बताए मार्ग पर चलो गुरु ही नैया भवसागर पार लगाएंगे इस अवसर पर महामंडलेश्वर डॉ राधा गिरी महाराज महामंडलेश्वर संजय गिरी महाराज अखाड़े के महामंत्री शैलेंद्र गिरी महाराज महंत विष्णु दास महाराज महंत थाना पति आकाश गिरी महाराज श्री मनोज गिरी महाराज महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज महंत रवि देव महाराज महंत कमलेशा नंद सरस्वती महाराज महंत प्रेमानंद महाराज महंत साक्षी गिरी महाराज महंत महानंद जी महाराज महंत कमलेश्वरानंद महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज कोतवाल श्याम गिरी महाराज कोतवाल धर्मदास महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे




