रुक्मणी विवाह प्रसंग सुन भक्तजन हुए भाव-विभोर हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध खिचड़ी वाले बाबा आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास पूज्या साध्वी श्यामा शास्त्री जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मणी के दिव्य विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा का रसपान कर रहे श्रद्धालु भक्तजन भक्ति भाव में डूब गए तथा पूरा वातावरण “राधे-कृष्ण” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा।कथा व्यास साध्वी श्यामा शास्त्री जी ने कहा कि भगवान की लीला अनंत और अलौकिक है। मनुष्य का जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए उसे अहंकार का त्याग कर प्रभु की शरण ग्रहण करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संसार में जो कुछ भी घटित हो रहा है, उसका संचालन भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य इच्छा से होता है। उनकी महिमा का वर्णन शब्दों में संभव नहीं है।रुक्मणी विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मणी भगवान श्रीकृष्ण को अपने हृदय से पति रूप में स्वीकार कर चुकी थीं। जब उनका विवाह शिशुपाल से निश्चित किया गया तो उन्होंने एक ब्राह्मण के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजा। भक्तवत्सल भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मणी की पुकार सुनकर विदर्भ पहुंचकर उन्हें अपने रथ में बैठाया और समस्त विरोधों को परास्त करते हुए विधिपूर्वक विवाह संपन्न किया। यह प्रसंग भक्त और भगवान के अटूट प्रेम, समर्पण तथा विश्वास का प्रतीक है।साध्वी श्यामा शास्त्री जी ने कहा कि जिस प्रकार रुक्मणी जी ने पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान को अपना सर्वस्व माना, उसी प्रकार यदि मनुष्य भी सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करे तो भगवान उसके जीवन के समस्त संकट दूर कर देते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं गीता में कहा है—”अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥” अर्थात जो भक्त अनन्य भाव से मेरा चिंतन और उपासना करते हैं, उनके योग-क्षेम का वहन मैं स्वयं करता हूँ।इस अवसर पर मुख्य यजमान फरीदाबाद निवासी श्री राजपाल त्यागी एवं श्रीमती अंजू त्यागी सहित भारी संख्या में श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित रहे। सभी भक्तजन कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य एवं कृतार्थ बना रहे हैं। अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।




