योगिनी एकादशी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, गुरु श्री महंत जयराम दास महाराज ने बताया व्रत, भक्ति और सत्कर्म का दिव्य महत्व हरिद्वार

हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद। श्री वशिष्ठ सप्तऋषि दूधाधारी आश्रम, ब्रह्मपुरी, हरिद्वार में योगिनी एकादशी महापर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर परमात्मा स्वरूप, प्रातः स्मरणीय गुरुदेव श्री महंत जयराम दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को योगिनी एकादशी की अनंत महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि एकादशी का व्रत केवल अन्न का त्याग नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता का महान संकल्प है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में योगिनी एकादशी का विशेष महत्व है। यह व्रत मनुष्य के पापों का क्षय कर उसे भगवान श्रीहरि की कृपा का पात्र बनाता है। सच्ची श्रद्धा, निष्काम भक्ति, सत्संग, सेवा, दान और सदाचार से ही मानव जीवन धन्य बनता है। जो श्रद्धालु पूर्ण आस्था और नियमपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत करते हैं, भगवान विष्णु उन पर अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं तथा उनके जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। महंत जयराम दास जी महाराज ने कहा कि वर्तमान युग में मनुष्य को लोभ, मोह, क्रोध और अहंकार का त्याग कर धर्म, सत्य और करुणा के मार्ग पर चलना चाहिए। सत्संग आत्मा का भोजन है और भगवान के नाम का स्मरण ही कलियुग में सबसे सरल एवं श्रेष्ठ साधना है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से मानव सेवा को ही सच्ची ईश्वर सेवा मानते हुए समाज में प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश फैलाने का आह्वान किया। इस अवसर पर आश्रम परिसर में भजन-कीर्तन, विष्णु पूजन एवं सामूहिक आरती का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज के दिव्य प्रवचनों का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया तथा योगिनी एकादशी व्रत का संकल्प लेकर भगवान श्रीहरि से विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और शांति की प्रार्थना की। संपूर्ण आश्रम भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा और “जय श्रीहरि” तथा “हरि नाम संकीर्तन” के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
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