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श्रीमद्भागवत कथा के अमृत रस से भक्त हुए भावविभोर, चौथे दिवस श्रीकृष्ण बाल लीलाओं का हुआ दिव्य वर्णन हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। भूपतवाला स्थित ब्रह्म निवास उत्तरी भाग में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में कथा व्यास पंडित जगदीश जी शास्त्री ‘भागवत किंकर केसरी’ के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही श्रीमद्भागवत कथा का अमृत रसपान कर श्रद्धालु अपने जीवन को धन्य एवं कृतार्थ बना रहे हैं। कथा के चौथे दिवस श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के मध्य भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण एवं हृदयस्पर्शी वर्णन किया गया। कथा व्यास पंडित जगदीश जी शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए ही नहीं, बल्कि भक्तों के कल्याण और धर्म की पुनः स्थापना के लिए हुआ था। उन्होंने नंदोत्सव, पूतना वध, शकटासुर उद्धार तथा माखन चोरी जैसी बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान की प्रत्येक लीला जीवात्मा को भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश देती है। भगवान श्रीकृष्ण की मोहक बाल लीलाओं का श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे तथा सम्पूर्ण वातावरण “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोषों से गुंजायमान हो गया। इस अवसर पर कथा के यजमान मध्य प्रदेश के माथुर निवासी श्री मेरूलाल जी भालोट ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाली दिव्य ज्ञानगंगा है। कथा श्रवण से मन को शांति, आत्मा को तृप्ति तथा जीवन को नई प्रेरणा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि कथा के माध्यम से भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा निरंतर बढ़ती है तथा जीवन के सभी दुःख और कष्ट दूर होने लगते हैं। श्री रणछोड़ दास जी ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मकल्याण का महान साधन है। कथा के प्रत्येक प्रसंग से जीवन जीने की कला सीखने को मिलती है। श्री गणपत लाल जी ने कहा कि कथा श्रवण से मन निर्मल होता है तथा भगवान के चरणों में अटूट भक्ति जागृत होती है। श्री रामचंद्र जी एवं श्री उदय लाल जी सहित अन्य यजमानों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कथा के दिव्य प्रसंगों का श्रवण कर हृदय आनंद और भक्ति से भर जाता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण कर अपने जीवन को सफल बनाने का आह्वान किया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव से कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य एवं कृतार्थ बनाया।

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