श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा भक्ति का रस, चतुर्थ दिवस गोवर्धन लीला के दिव्य प्रसंग से श्रद्धालु हुए भावविभोर हरिद्वार


हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध सदाणी संत निवास आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में भुज, गुजरात के काली तरवाड़ी एवं अन्य क्षेत्रों से पधारे सैकड़ों श्रद्धालु भक्तजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ कथा श्रवण कर रहे हैं। कथा व्यास प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री हार्दिक उपाध्याय जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही श्रीमद्भागवत कथा भक्तों के जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर रही है तथा सभी को धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश दे रही है।चतुर्थ दिवस की कथा में गुरु भगवान श्री हार्दिक उपाध्याय जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब ब्रजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा से इन्द्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की, तब देवराज इन्द्र क्रोधित हो गए और उन्होंने मूसलधार वर्षा कर सम्पूर्ण ब्रज को संकट में डाल दिया। उस समय बाल स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर समस्त ब्रजवासियों, गौओं और जीव-जंतुओं की रक्षा की।
कथा व्यास ने कहा कि यह प्रसंग हमें सिखाता है कि जो व्यक्ति भगवान पर पूर्ण विश्वास रखता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, प्रभु की कृपा से उसका समाधान अवश्य होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अहंकार का त्याग कर भक्ति, सेवा और विनम्रता को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।कथा के यजमान श्री बेलजी भाई यादव, श्री हरदीप भाई सुथा, छावड़ा परिवार तथा अंजार (गुजरात) से पधारे श्री प्रवीण भाई पटेल एवं श्रीमती शिल्पा बेन सहित अनेक श्रद्धालु भक्तों ने कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य एवं कृतार्थ बताया। उपस्थित भक्तों ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण और जीवन के उत्थान का दिव्य माध्यम है। कथा के प्रत्येक प्रसंग से जीवन को नई दिशा और आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त होती है।कथा के दौरान आश्रम परिसर भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष, भजनों और हरिनाम संकीर्तन से भक्तिमय बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण कर भक्ति रस में सराबोर हुए तथा गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।




