श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ा भक्ति रस का सागर हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद पावन धरा खड़ीखड़ी स्थित प्रसिद्ध मलतान जोत भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक आनंद की अनुपम गंगा प्रवाहित हो रही है। कथा व्यास परम वंदनीय दर्शन भाई जोशी जी महाराज अपने श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथा का रसपान कराते हुए भक्तजनों के हृदय को भक्ति भाव से सराबोर कर रहे हैं।मां गंगा के पावन तट पर हो रही इस दिव्य कथा में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचकर अपने जीवन को धन्य एवं कृतार्थ बना रहे हैं। कथा के दौरान जब भगवान श्रीकृष्ण की मधुर लीलाओं, भक्तों के प्रेम और धर्म के पावन संदेशों का वर्णन होता है, तब पूरा वातावरण “राधे-राधे” और “हरि बोल” के जयघोष से भक्तिमय हो उठता है।इस पावन अवसर पर यजमान पोरबंदर परिवार लगभग 60 श्रद्धालुओं के साथ हरिद्वार पहुंचकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त कर रहा है। परिवार के सभी सदस्य अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति भाव से कथा में सम्मिलित होकर संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। परम वंदनीय दर्शन भाई जोशी जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवात्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला दिव्य सेतु है। जो मनुष्य सच्चे भाव से भगवान का स्मरण और कथा श्रवण करता है, उसका जीवन स्वतः ही आनंद, शांति और भक्ति से परिपूर्ण हो जाता है। हरिद्वार की इस पुण्यभूमि पर बह रही भक्ति की अविरल धारा प्रत्येक श्रद्धालु के हृदय में प्रभु प्रेम का दीप प्रज्वलित कर रही है।

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