स्वामी राजेंद्रानंद जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि हरिद्वार

हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। भीमगोड़ा स्थित श्री बिश्नोई आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी महामंडलेश्वर राजेंद्रानंद जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर स्मरण महोत्सव एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम गांदी नसीन महंत जी महाराज एवं उनके गुरु भाइयों की उपस्थिति में विशाल संत समागम के रूप में श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर संत-महात्माओं ने ब्रह्मलीन स्वामी राजेंद्रानंद जी महाराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए उन्हें धर्म, अध्यात्म एवं संत परंपरा का समर्पित साधक बताया। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित संतों ने उनके द्वारा समाज एवं सनातन संस्कृति के लिए किए गए कार्यों को याद करते हुए कहा कि महापुरुष भले ही शरीर रूप में हमारे बीच न हों, लेकिन उनके विचार, संस्कार और आध्यात्मिक संदेश सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं। महंत परम पूज्य स्वामी प्रणवानंद जी महाराज ने अपने श्रीमुख से गुरु महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु का जीवन केवल स्वयं के कल्याण तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज को सत्य, सेवा, संयम और सदाचार की राह दिखाता है। गुरु के चरणों में समर्पण ही साधना को सार्थक दिशा प्रदान करता है।वहीं महामंडलेश्वर 1008 प्रातः स्मरणीय परम पूज्य स्वामी रामानुज सरस्वती जी महाराज, पीठाधीश्वर आनंदवन समाधि ने भी अपने पावन विचारों से संत समाज एवं श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश प्रदान किया। उन्होंने ब्रह्मलीन संत के जीवन को स्मरण करते हुए कहा कि संतों की पुण्य स्मृति समाज में सदैव प्रेरणा का प्रकाश फैलाती है। इस अवसर पर महंत सूरज दास जी महाराज ने भी अपने श्रीमुख से पावन विचार व्यक्त करते हुए ब्रह्मलीन स्वामी राजेंद्र आनंद जी महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित होता है। ऐसे संतों की स्मृति का आयोजन नई पीढ़ी को धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर ब्रह्मलीन स्वामी राजेंद्रानंद जी महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित किए। संत समागम के उपरांत संत सेवा एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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