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श्री वशिष्ठ दूधाधारी सप्त ऋषि आश्रम में संत समागम एवं विशाल भंडारा, गुरुजनों की स्मृति में उमड़ा संत समाज हरिद्वार

 हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। ब्रह्मपुरी स्थित श्री वशिष्ठ दूधाधारी सप्त ऋषि आश्रम के हनुमान मंदिर में प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर नरसिंह दास दूधाधारी जी महाराज एवं श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर लक्ष्मण दास जी महाराज की पतित पावन स्मृति में विशाल संत समागम एवं भंडारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रातः स्मरणीय साक्षात परमात्मा स्वरूप महंत जयराम दास जी महाराज के पतित पावन सानिध्य तथा श्री श्री महंत जय रामदास जी महाराज की कृपा से संपन्न हुआ। इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत रघुवीर दास महाराज, ने कहा गुरु चरणों की महिमा बड़ी ही अपरंपार है जो इसे समझ गया वह भव पार हो गया, जो भक्त गुरु की शरणागत हो जाते हैं उनका मानव जीवन धन्य तथा कृतार्थ हो जाता है गुरुजनों के श्री चरणों से मिलने वाला ज्ञान उनके भाग्य का उदय कर देता है इस दौरान देशभर से पहुंचे संत-महापुरुषों ने दोनों पूज्य संतों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आध्यात्मिक एवं संत समाज के प्रति योगदान का स्मरण किया। इस अवसर पर महंत जय रामदास जी महाराज ने कहा कि गुरु का जीवन समाज को धर्म, सेवा और संस्कारों की राह दिखाता है। पूज्य संतों की स्मृतियां सदैव संत समाज और भक्तों के हृदय में जीवित रहती हैं। महंत , रामदास महाराज ने कहा कि गुरु चरणों का स्मरण मनुष्य के जीवन को पवित्रता और सद्मार्ग प्रदान करता है। संत महापुरुषों का जीवन त्याग, तपस्या और मानव सेवा की प्रेरणा देता है। महामंडलेश्वर श्याम दास जी महाराज ने कहा कि संतों का सानिध्य जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। गुरुजनों द्वारा दिखाए गए सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।महंत रघुवीर दास जी महाराज ने कहा कि संतों की वाणी और उनके आदर्श समाज के लिए सदैव मार्गदर्शक बने रहते हैं। पूज्य गुरुजनों की पुण्य स्मृति में आयोजित यह समागम श्रद्धा और भक्ति का पावन अवसर है। महंत जगदीश दास जी महाराज ने कहा कि गुरु कृपा से ही जीवन में आध्यात्मिक चेतना का जागरण होता है। संतों के बताए मार्ग पर चलकर मानव जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। महंत परमेश्वर दास जी महाराज ने कहा कि गुरु और संतों की सेवा भारतीय सनातन परंपरा की महान धरोहर है। पूज्य संतों का स्मरण भक्तों को धर्म, भक्ति और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर महामंडलेश्वर किशन दास जी महाराज, महंत नारायण दास पटवारी जी महाराज, महंत रामदास जी महाराज, महंत रघुवीर दास जी महाराज, महंत मस्त गिरी जी महाराज, महंत मुरारी दास जी महाराज, श्री कृष्ण मुरारी अग्रवाल, कोतवाल रामदास जी महाराज, महंत रघुनाथ दास जी महाराज, महंत जगदीश दास जी महाराज, स्वामी रामदास जी महाराज सहित भारी संख्या में संत-महापुरुष उपस्थित रहे। सभी संत-महापुरुषों ने श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर नरसिंह दास दूधाधारी जी महाराज एवं श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर लक्ष्मण दास जी महाराज का भावपूर्ण स्मरण करते हुए उनके श्रीचरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए। संतों ने कहा कि दोनों पूज्य संतों ने धर्म, अध्यात्म और संत परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसे सदैव स्मरण किया जाता रहेगा। कार्यक्रम के अंत में संत-महापुरुषों एवं श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में सेवा एवं श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर महंत दुर्गादास जी महाराज, महंत हरेंद्र दास जी महाराज, महंत प्रहलाद दास जी महाराज, महंत बिहारी शरण जी महाराज, स्वामी अंकित शरण जी महाराज, स्वामी हनुमान दास जी महाराज सहित अनेक संत-महापुरुष उपस्थित रहे। पूरे आश्रम परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

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