श्रीमद्भागवत कथा में चौथे दिन उमड़ा श्रद्धा का सैलाब भगवान की भक्ति और सत्संग ही मानव जीवन को बनाते हैं सार्थक—श्री कीर्ति महाराज हरिद्वार

हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। भूपतवाला स्थित श्री कृष्णा हरि धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास श्री कीर्ति महाराज ने भक्तजनों को भगवान की भक्ति, सत्संग और सद्कर्मों की महिमा का सुंदर वर्णन सुनाया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करने वाला दिव्य ग्रंथ है। भगवान के नाम का स्मरण और संतों का सानिध्य मनुष्य के अंतर्मन को निर्मल कर उसके जीवन को धर्म, प्रेम और सदाचार से जोड़ता है। कथा व्यास ने सुंदर दृष्टांत के माध्यम से समझाया कि जिस प्रकार अंधकार में दीपक प्रकाश का मार्ग दिखाता है, उसी प्रकार भगवान की भक्ति मनुष्य के जीवन में ज्ञान और सत्य का प्रकाश करती है। मनुष्य को सांसारिक मोह-माया में उलझने के बजाय प्रभु के चरणों में अपना मन लगाकर सेवा, परोपकार और सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए। भागवत कथा का श्रवण तभी सार्थक है, जब उसके संदेश को अपने जीवन में उतारा जाए। इस अवसर पर मुख्य यजमान श्री हरि भाई पटेल जी अहमदाबाद, नार्वे राम भाई पटेल, उद्धव जी भाई पटेल एवं श्री छोटा लाल पटेल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तों ने कथा श्रवण कर भगवान श्रीहरि के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।मुख्य यजमान श्री हरि भाई पटेल जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य के जीवन में भक्ति और संस्कारों का संचार करती है। प्रभु की कथा का श्रवण करने से मन को शांति और जीवन को नई दिशा प्राप्त होती है। नार्वे राम भाई पटेल ने कहा कि संतों के श्रीमुख से भगवान की महिमा सुनना स्वयं में सौभाग्य की बात है। भागवत कथा हमें सत्य, धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उद्धव जी भाई पटेल ने कहा कि भगवान के नाम और कथा का स्मरण जीवन के दुखों को दूर कर मन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सत्संग और भक्ति को स्थान देना चाहिए। श्री छोटा लाल पटेल ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का पावन माध्यम है। प्रभु की भक्ति और संतों का आशीर्वाद ही मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।





