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श्री श्याम वैकुंठ धाम स्थापना दिवस पर भव्य ध्वज यात्रा एवं संत समागम का दिव्य आयोजन, भक्ति और ज्ञान की सरिता में डूबा श्यामपुर क्षेत्र हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद प्रसिद्ध श्यामपुर क्षेत्र स्थित श्री श्याम वैकुंठ धाम में स्थापना दिवस का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दिव्य अवसर पर प्रातःकाल से ही धाम परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर को भव्य रूप से फूलों, रंग-बिरंगी झालरों और आकर्षक सजावट से सजाया गया था, जिससे सम्पूर्ण वातावरण अलौकिक एवं भक्तिमय दिखाई दे रहा था। स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला ने श्रद्धालुओं के मन को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ विशाल एवं भव्य ध्वज यात्रा से हुआ, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं, भक्तों एवं धर्मप्रेमियों ने भाग लिया। ध्वज यात्रा श्यामपुर क्षेत्र के प्रमुख मार्गों से होकर निकली, जिसमें भक्तगण भगवान श्री हरि के जयकारों, भजन-कीर्तन और ढोल-नगाड़ों की मंगल ध्वनि के साथ आगे बढ़ते रहे। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया और धर्म ध्वज के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। ध्वज यात्रा ने सम्पूर्ण क्षेत्र को भक्तिमय ऊर्जा से भर दिया।

स्थापना दिवस के अवसर पर संत महापुरुषों का भव्य समागम भी आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न स्थानों से पधारे संतों और विद्वान महात्माओं ने अपने श्रीमुख से धर्म, अध्यात्म और मानव जीवन के कल्याणकारी संदेश दिए। संतों ने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य ईश्वर प्राप्ति है और इसके लिए निरंतर भगवान का स्मरण ही सबसे सरल और श्रेष्ठ साधन है। सत्संग के माध्यम से भक्तों को धर्ममार्ग पर चलने, सदाचार अपनाने और गुरु कृपा का महत्व समझाया गया। इसी अवसर पर श्री श्याम वैकुंठ धाम के पूज्य श्री महंत श्याम सुंदर महाराज ने अपने प्रेरणादायी और हृदयस्पर्शी प्रवचनों से भक्तों को जीवन की वास्तविक साधना का सरल मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि अपने दैनिक जीवन के प्रत्येक कार्य में भगवान का स्मरण जोड़ ले, तो उसका संपूर्ण जीवन साधना बन सकता है। उन्होंने कहा कि यदि स्नान करते समय भगवान को याद किया जाए तो वह साधारण स्नान नहीं, बल्कि तीर्थ स्नान बन जाता है। यदि भोजन करते समय भगवान का स्मरण किया जाए तो वही भोजन प्रसाद का स्वरूप धारण कर लेता है। यदि यात्रा करते समय भगवान का चिंतन हो तो वह साधारण यात्रा न रहकर तीर्थयात्रा बन जाती है।

उन्होंने आगे अपने श्रीमुख से कहा कि यदि भोजन बनाते समय भगवान को स्मरण किया जाए तो वह महाप्रसाद बन जाता है, यदि सोते समय प्रभु का ध्यान किया जाए तो वह ध्यान-निद्रा कहलाती है, और यदि अपने कर्म करते समय भगवान का स्मरण किया जाये तो वही कर्मयोग बन जाता है। पूज्य महंत श्री श्याम सुंदर महाराज ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जीवन के प्रत्येक पवित्र कार्य में यदि गुरु का पावन सान्निध्य और उनके वचनों का अनुसरण किया जाए, तो वही ज्ञान की सरिता बनकर मनुष्य को उसके कर्तव्य पथ पर अग्रसर करती है और सफलता के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचाने का माध्यम बनती है।

कार्यक्रम के दौरान भजन संध्या का आयोजन भी किया गया, जिसमें भजन गायकों ने भगवान श्री हरि भगवान श्री श्याम प्रभु की महिमा का गुणगान कर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। श्रद्धालु भजनों की धुन पर झूमते नजर आए और पूरा धाम श्याममय वातावरण में डूब गया। इसके पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। स्थापना दिवस का यह पावन समारोह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति, सेवा और ज्ञान का महापर्व बनकर सामने आया। इस आयोजन ने सभी भक्तों को यह प्रेरणा दी कि यदि जीवन का प्रत्येक कार्य भगवान और गुरु स्मरण के साथ किया जाए, तो जीवन का हर क्षण पवित्र और सार्थक बन सकता है। श्री श्याम वैकुंठ धाम का यह स्थापना दिवस समारोह भक्तों के हृदय में आध्यात्मिक चेतना और नई ऊर्जा का संचार कर गया तथा क्षेत्र में धर्म और भक्ति की ज्योति को और अधिक प्रज्वलित कर गया।

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