भक्ति और सत्संग से ही मानव जीवन बनता है धन्य : श्री कृपाराम जी महाराज हरिद्वार

हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद। भूपतवाला की भट्ट कॉलोनी स्थित गुरु कृपा धाम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भावपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। कथा के अंतिम दिवस कथा व्यास परम पूज्य प्रातः स्मरणीय श्री कृपाराम जी महाराज ने श्रीमद् भागवत के आध्यात्मिक प्रसंगों का सुंदर वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल श्रवण करने का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन को सत्य, धर्म, भक्ति और सदाचार की ओर ले जाने वाली दिव्य साधना है। भगवान के नाम का स्मरण और संतों का सानिध्य जीवन के सभी संतापों को दूर कर आत्मिक शांति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में अहंकार, मोह और सांसारिक विकारों का त्याग कर प्रभु के चरणों में अपनी आस्था को दृढ़ करना चाहिए।इस अवसर पर प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान परम पूज्य राजाराम जी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप का बोध कराती है। भगवान की भक्ति, गुरु के प्रति श्रद्धा और संतों की सेवा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार और समाज में कथा, सत्संग तथा संस्कारों की परंपरा जीवित रहती है, वहां धर्म और संस्कृति सदैव सुरक्षित रहती है। कथा का आयोजन राजस्थान, जोधपुर एवं सूरत, गुजरात से पधारे श्री सत्यनारायण जी, मोहनलाल जी एवं चेतन भाई मालपानी परिवार द्वारा श्रद्धा और भक्ति भाव से कराया गया। कथा के समापन अवसर पर परिवार की ओर से सभी संत-महापुरुषों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए चेतन भाई मालपानी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण हमारे परिवार के लिए सौभाग्य और परम सौगात है। प्रभु की कृपा से ही ऐसा धार्मिक आयोजन संपन्न हो पाता है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि धर्म, भक्ति और सनातन संस्कारों की यह ज्योति निरंतर प्रज्वलित होती रहे। श्री सत्यनारायण जी एवं मोहनलाल जी ने कहा कि भगवान की कथा मनुष्य को भीतर से शुद्ध कर जीवन को नई दिशा प्रदान करती है। संतों के श्रीमुख से निकला एक-एक शब्द जीवन के लिए मार्गदर्शन बन जाता है। उन्होंने कथा में पधारे सभी श्रद्धालुओं और संत-महापुरुषों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रभु की भक्ति और संतों का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने कथा व्यास एवं संत-महापुरुषों का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा भक्ति भाव से भगवान का गुणगान करते हुए अपने जीवन को धन्य बनाने का संकल्प लिया।




