जिस पर गुरु तथा भगवत कृपा हो जाए उसका लोक एवम परलोक दोनों सुधर जाते हैं श्री महंत विष्णु दास महाराज हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंदश्रवणनाथ नगर, हरिद्वार स्थित सेवा समिति हाल में श्री गुरु रामसेवक उछाली के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन (पूर्णाहुति) अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कथा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था तथा भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार से वातावरण दिव्यता से परिपूर्ण हो गया।कथा व्यास परम पूज्य संत श्री चिन्मयानंद बापू ने अपने अमृतमय प्रवचनों में कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण पृथ्वी लोक पर समस्त वेदों और पुराणों का सार है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की सच्ची कला का मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि जो मनुष्य श्रद्धा और विश्वास के साथ इस पावन कथा का श्रवण करता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा आत्मिक संतोष की प्राप्ति होती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस कथा का प्रभाव इतना व्यापक है कि यदि कोई व्यक्ति दूर से भी इसका श्रवण कर ले, तो उसका भी कल्याण निश्चित हो जाता है तथा उसके पितरों का तर्पण स्वतः संपन्न हो जाता है। उन्होंने आगे कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात स्वरूप है, जो मनुष्य को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश देती है। इस कथा के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन के अंधकार को दूर कर सत्य और धर्म के मार्ग पर अग्रसर हो सकता है। बड़े से बड़ा पापी भी यदि सच्चे मन से इस कथा को सुनता और आत्मसात करता है, तो वह भी पापों से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।इस अवसर पर आश्रम के परमाध्यक्ष महंत श्री विष्णु दास जी महाराज ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि गुरु का स्थान जीवन में सर्वोपरि होता है। गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के चरणों में ही चारों धाम का वास होता है, अर्थात जो व्यक्ति गुरु की शरण में आ जाता है, उसे तीर्थों की यात्रा के समान पुण्य प्राप्त होता है। गुरु अपने शिष्यों को सही मार्ग दिखाते हैं और उन्हें उंगली पकड़कर भवरूपी सागर से पार कराते हैं। सच्चे गुरु की कृपा से ही मनुष्य को ईश्वर का साक्षात्कार संभव हो पाता है।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न भजन मंडलियों द्वारा मधुर भजनों की प्रस्तुति दी गई, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के समापन पर हवन-पूजन और आरती का आयोजन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। इसके पश्चात प्रसाद वितरण किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा के साथ ग्रहण किया।संतों ने अपने संदेश में यह भी कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करता है। इसके श्रवण और मनन से मनुष्य के भीतर सकारात्मक परिवर्तन आता है, जिससे वह समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। इस प्रकार यह संपूर्ण आयोजन भक्तों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत बना। कथा की पूर्णाहुति के साथ ही सभी श्रद्धालुओं ने यह संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में धर्म, सत्य और भक्ति के मार्ग का अनुसरण करेंगे तथा समाज में सद्भाव और सेवा की भावना को बढ़ावा देंगे। निगमकल्पतरोर्गलितं फलम् शुकमुखादमृतद्रवसंयुतम्। पिबत भागवतं रसालयं मुहुरहो रसिका भुवि भावुकाः॥” इस अवसर पर श्री महंत श्यामसुंदर दास महाराज बाबा सरयू दास महाराज महंत जय रामदास महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा हजारों की संख्या में भक्तजन उपस्थित थे

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