पूज्य माता साहिब हासी देवी जी का 200वां जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हरिद्वार


हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद। भूपतवाला स्थित सदाणी सेवा स्थानम, सप्त सरोवर मार्ग में पूज्य माता साहिब हासी देवी जी का 200वां जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। प्रातः स्मरणीय परम पूज्य परमात्मा स्वरूप संत डॉ. युधिष्ठिर लाल जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित इस भव्य समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं एवं भक्तों ने भाग लेकर अपनी श्रद्धा अर्पित की। संपूर्ण वातावरण भक्ति रस, सत्संग, कथा एवं संतवाणी से आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। समारोह के अंतर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ में पूज्य साध्वी समहिता जी ने अपने श्रीमुख से कथा का अमृतपान कराया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को ईश्वर से जोड़ने वाला दिव्य सेतु है। माता साहिब हासी देवी जी का जीवन त्याग, सेवा, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम उदाहरण रहा है। उनके आदर्श आज भी समाज को धर्म और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे रहे और अनेक भक्तों की आंखें भाव-विभोर होकर नम हो गईं। अपने आशीर्वचन में परम पूज्य संत डॉ. युधिष्ठिर लाल जी महाराज ने कहा कि माता साहिब हासी देवी जी ने अपना संपूर्ण जीवन मानव सेवा और ईश्वर भक्ति को समर्पित किया। उनका जीवन हमें यह संदेश देता है कि सेवा ही सच्ची साधना और मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन समाज को दिशा देने के लिए होता है और माता जी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को सदाचार, सेवा और सत्संग के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।राज्य मंत्री एवं गंगा सभा के अध्यक्ष श्री नितिन गौतम जी ने कहा कि हरिद्वार की पावन धरती संतों और महापुरुषों की तपस्थली रही है। माता साहिब हासी देवी जी ने समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का जो कार्य किया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में प्रेम, भाईचारा और संस्कारों की भावना को मजबूत किया जा सकता है। पार्षद श्री आकाश भाटी ने अपने संबोधन में कहा कि माता जी का जीवन नारी शक्ति, सेवा और त्याग का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग को समान दृष्टि से देखते हुए मानवता की सेवा की। आज आवश्यकता है कि हम उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज को बेहतर बनाने में अपना योगदान दें। श्री हर्षवर्धन जैन ने कहा कि संतों और महापुरुषों का जीवन समाज को नई दिशा प्रदान करता है। माता साहिब हासी देवी जी की शिक्षाएं प्रेम, करुणा और आध्यात्मिक जागृति का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है। सदाणी दरबार के प्रवक्ता श्री नंदलाल साहितया ने माता जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने सदैव सेवा, समर्पण और परोपकार को प्राथमिकता दी। उनके जीवन का प्रत्येक क्षण मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने बताया कि सदाणी दरबार द्वारा उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। श्री अमरलाल दास जी ने कहा कि माता साहिब हासी देवी जी की दिव्य प्रेरणा आज भी लाखों श्रद्धालुओं के जीवन को प्रकाशित कर रही है। उनके द्वारा स्थापित सेवा और भक्ति की परंपरा निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलता है, उसे जीवन में सच्ची शांति और संतोष प्राप्त होता है। परम पूज्य गुरु माता दीपिका देवी ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि माता साहिब हासी देवी जी केवल एक महान संत नहीं थीं, बल्कि करुणा, वात्सल्य और आध्यात्मिक प्रेम की साक्षात प्रतिमूर्ति थीं। उन्होंने कहा कि माता जी का जीवन हमें सिखाता है कि ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग प्रेम, सेवा और समर्पण से होकर जाता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन अपनाने और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में उतारने का संदेश दिया। इस अवसर पर आसनदास, मोहनानी, जयराज, शुभराजमल, भजनलाल झामवीया सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, कथा एवं संतवाणी का रसास्वादन किया। समारोह के दौरान गुरुजनों ने जानकारी देते हुए बताया कि पूज्य माता साहिब हासी देवी जी के 200वें जन्मोत्सव वर्ष को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान करने के लिए भारत सरकार द्वारा उनकी स्मृति में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। यह समाचार सुनते ही उपस्थित श्रद्धालुओं ने हर्ष व्यक्त किया और माता जी के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। समस्त कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम रहा। अंत में विश्व कल्याण, राष्ट्र की उन्नति एवं मानव मात्र के सुख-समृद्धि की कामना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।



