कुछ तथाकथित पत्रकारों की गतिविधियों से धूमिल हो रही पत्रकारिता की छवि हरिद्वार

हरिद्वार पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, किंतु कुछ तथाकथित पत्रकारों एवं असामाजिक तत्वों की गतिविधियों के कारण इस सम्मानित क्षेत्र की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। विभिन्न धार्मिक आयोजनों, कथा, सत्संग, भंडारों एवं अन्य कार्यक्रमों में ऐसे लोग पहुंच जाते हैं जिनका उद्देश्य समाचार संकलन से अधिक व्यक्तिगत लाभ प्राप्त करना प्रतीत होता है। चर्चाओं के अनुसार कई आयोजनों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग उपस्थित होते हैं जो स्वयं को पत्रकार बताते हैं, किंतु कार्यक्रमों की समाचार कवरेज में उनकी कोई विशेष भूमिका दिखाई नहीं देती। इससे आयोजकों में भी असंतोष देखने को मिलता है और कई बार वास्तविक पत्रकारों को भी अनावश्यक संदेह का सामना करना पड़ता है। हाल ही में हरिद्वार के उत्तरी क्षेत्र में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान भी आयोजकों ने इस प्रकार की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि पत्रकारिता के नाम पर कुछ लोगों के आचरण से पूरे पत्रकार समाज की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। वरिष्ठ नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि पत्रकारिता एक सेवा और उत्तरदायित्व का क्षेत्र है। इसमें कार्य करने वालों को निष्पक्षता, ईमानदारी और मर्यादा का पालन करना चाहिए ताकि समाज में मीडिया के प्रति विश्वास बना रहे तथा वास्तविक पत्रकारों की मेहनत और प्रतिष्ठा सुरक्षित रह सके।


