बिना हार्ड की समस्या के चलते आखिर क्यों की गई हार्ड की जांच और बिना जानकारी के क्यों किया गया अन्य चिकित्सालय के लिए हस्तगत हरिद्वार

हरिद्वार। ज्वालापुर स्थित अवधूत मंडल आश्रम के निकट संचालित स्वामी राम प्रकाश चैरिटेबल हॉस्पिटल में चैरिटी के नाम पर मरीजों से उपचार के दौरान कथित रूप से आचरण किया जाने का मामला सामने आया है। ज्ञात होगी श्रीमती मुन्नी चौहान को कमजोरी तथा घुटने के दर्द के लिए चिकित्सालय ले जाया गया था किंतु वहां अनावश्यक रूप से कई हजार रुपए के बिना आवश्यकता वाले टेस्ट करये, और बाद में उनसे पल्ला झाड़ने हुए उन्हें हार्ड की समस्या बताकर सिटी हॉस्पिटल भेज दिया गया जहां फिर उनके कई हजार रुपए के पुनः वही टेस्ट किये गए आखिर प्रश्न यह है कि जब श्रीमती मुन्नी चौहान को हार्ड से संबंधित कोई समस्या थी ही नहीं तो उनकी अनावश्यक जांच क्यों की गई और उन्हें पुनः हार्ड की समस्या के लिए दूसरे चिकित्सालय क्यों भेजा गया क्या चिकित्सालय को उन्हें भेजा गया जब संबंधित बीमारी का वहां कोई डॉक्टर है ही नहीं तो चिकित्सालय को हार्ड की समस्या का कैसे पता चला जब वहां चिकित्सक है ही नहीं हार्ड से संबंधित तो इसकी जांच क्यों की गई और हार्ड की समस्या क्या उन्हें कैसे पता चला प्रसिद्ध ब्रह्म आत्म भवन आश्रम, श्रवण नाथ नगर की संस्थापिका श्रीमती मुन्नी चौहान के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।परिजनों के अनुसार श्रीमती मुन्नी चौहान को घुटने में दर्द, भूख न लगने और कमजोरी की शिकायत के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि भर्ती के बाद विभिन्न जांचों के नाम पर हजारों रुपये की रसीदें काटी गईं। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन को बताया कि मरीज संत हैं और चैरिटेबल अस्पताल में उनका उपचार निशुल्क अथवा रियायती दर पर होना चाहिए, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। मामले को लेकर सिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष ठाकुर मनोजानंद द्वारा चिकित्सक डॉ. शाह से मुलाकात का प्रयास किया गया। उनके अनुसार करीब दो घंटे इंतजार के बाद भी चिकित्सक से उचित बातचीत नहीं हो सकी। आरोप है कि चिकित्सक ने बाद में शाम को लौटकर मामले को देखने की बात कही, लेकिन वापस आने के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि बाद में देहरादून स्थित संबंधित चिकित्सालय के एक चिकित्सक, जिन्हें अस्पताल का इंचार्ज बताया गया, से बातचीत के बाद मरीज को दूसरे अस्पताल में भेजने की बात कही गई और यह कारण बताया गया कि यहां हृदय रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है। परिजनों का कहना है कि मरीज को हृदय संबंधी कोई शिकायत ही नहीं थी और लगभग 15 दिन पूर्व भी आवश्यक जांचें कराई जा चुकी थीं। परिजनों ने सवाल उठाया कि जब मरीज की मुख्य समस्या घुटने का दर्द, कमजोरी और भूख न लगना थी, तो उसका समुचित उपचार किए बिना हजारों रुपये की जांच कराने के बाद महज कुछ घंटों में अस्पताल से छुट्टी क्यों दी गई? गौरतलब है कि अस्पताल परिसर में लगाए गए बोर्ड पर विभिन्न स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के साथ कैशलेस सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी भी प्रदर्शित की गई है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल की चैरिटेबल सेवाओं, जांच शुल्क और उपचार व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की मांग की है।इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच होना आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग एवं शासन को अस्पताल की शुल्क व्यवस्था, चैरिटेबल सेवाओं और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। एक 12 सेकंड की वीडियो अन्य मरीजों की आप देखिए कि वहां मरीजों के साथ किस प्रकार का आचरण किया जाता है मरीज किस प्रकार इलाज के नाम पर परेशान तथा त्रस्त हैं कई हजार के टेस्ट करने के बाद कुछ घंटे में अनाप-शनाप बताकर, मरीज को कहीं और बड़ी कहानी बात कर हस्तगत करना मरीजों की जान माल के साथ खिलवाड़ है टेस्ट वगैरह जिला मेला चिकित्सालय में 15 दिन पूर्व ही हुए थे हार्ड कि उन्हें कोई समस्या नहीं थी ईसीजी में ऐसा कुछ नहीं आया, था जो वह बता रहे हैं केवल मरीजों से पल्ला झाड़ रहे हैं और जांच के नाम पर उनके साथ छल कर रहे हैं हार्ड की समस्या बात कर सिटी हॉस्पिटल भेज दिया गया जहां पुनः जांच करने पर पता चला हार्ड की कोई समस्या नहीं है केवल पानी की कमी है उसकी पूर्ति करनी है इस प्रकार का मरीज के साथ दुर्व्यवहार अशोभनीय विषय है

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