भगवान की भक्ति से ही जीवन में आता है सच्चा आनंद : कथा व्यास केतन पूनजानी हरिद्वार
हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद श्रवण नाथ नगर स्थित प्रसिद्ध भाटिया भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास परम पूज्य केतन पूनजानी जी ने श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति, प्रेम और समर्पण का सुंदर संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक होता है, जब उसका मन प्रभु के चरणों में समर्पित हो जाता है। उन्होंने कहा कि संसार की सभी उपलब्धियां क्षणभंगुर हैं, लेकिन भगवान का नाम और भक्ति मनुष्य के जीवन को जन्म-जन्मांतर तक प्रकाशित करने वाली शक्ति है।
कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं एवं गोवर्धन महिमा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि जब-जब भक्त सच्चे मन से भगवान को पुकारता है, तब प्रभु किसी न किसी रूप में उसकी रक्षा करने के लिए उपस्थित होते हैं। गोवर्धन लीला हमें यह संदेश देती है कि अहंकार का त्याग कर परमात्मा के प्रति पूर्ण विश्वास रखना चाहिए। कथा व्यास के सुंदर दृष्टांतों और मधुर वाणी से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर गुजरात से पधारे श्री अतुल पटेल जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का मार्ग है। भगवान की कथा मनुष्य के भीतर प्रेम, करुणा और सेवा की भावना को जागृत करती है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने व्यस्त जीवन में कुछ समय प्रभु के स्मरण और सत्संग के लिए अवश्य निकालना चाहिए, क्योंकि सत्संग ही मनुष्य को सही दिशा प्रदान करता है। कथा के मुख्य यजमान किशोर भाई श्री हरिलाल धन्दुकिया जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना स्वयं में परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि कथा के प्रत्येक प्रसंग में मानव जीवन के लिए कोई न कोई महत्वपूर्ण संदेश छिपा हुआ है। भगवान के चरणों में श्रद्धा और विश्वास रखने से जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी मनुष्य को आंतरिक शक्ति और शांति प्राप्त होती है। उन्होंने कथा में उपस्थित संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग और आशीर्वाद से यह पावन आयोजन भक्तिमय वातावरण में संपन्न हो रहा है। कथा के दौरान भजनों और भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान कर स्वयं को धन्य एवं कृतार्थ किया। इस अवसर पर श्री मितेश भाई, जो कि गुजरात से पधारे 500 से अधिक लोगों श्रद्धालुओं के भोजन व्यवस्था के साथ-साथ अनेकों जिम्मेदारियां का निर्माण कर रहे हैं ने कहा श्रीमद् भागवत कथा का इस पावन नगरी में रसपान कर हमारा जीवन धन्य हो गया

