स्वर्गवासी पुत्र की पावन स्मृति में श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य आयोजन हरिद्वार।
हरिद्वार भूपतवाला सप्त सरोवर रोड स्थित प्रसिद्ध श्री कामधेनु लोक में स्वर्गवासी पुत्र श्री मंत्र की पावन स्मृति में उनकी आत्मिक शांति, मुक्ति एवं तर्पण की मंगल कामना को लेकर श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य आयोजन किया जा रहा है। मुख्य यजमान गुजरात भावनगर निवासी श्री हेमंत भाई गोहिल ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती प्रमिला गोहिल एवं पुत्री प्रतीक्षा गोहिल सहित हरिद्वार की पावन धरा पर पहुंचकर इस धार्मिक आयोजन को श्रद्धा एवं भावपूर्ण वातावरण में कराया। कथा का रसपान कथा व्यास महेश भाई पाठक, गुजरात भावनगर के श्रीमुख से भक्तजन कर रहे हैं। कथा के प्रथम दिवस कथा व्यास महेश भाई पाठक ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का सुंदर वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल कथा श्रवण का माध्यम नहीं, बल्कि जीव के अंतर्मन को भगवान की भक्ति से जोड़ने वाला दिव्य मार्ग है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य श्रद्धा, विश्वास और समर्पण के साथ भगवान के नाम का स्मरण करता है तो उसके जीवन के संताप दूर होते हैं और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं तर्पण की भावना भी पुण्य का माध्यम बनती है। भागवत कथा श्रवण से मनुष्य को अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध होता है तथा ईश्वर के चरणों में भक्ति और विश्वास दृढ़ होता है। उन्होंने प्रथम दिवस के दृष्टांत में भागवत महापुराण की मंगलाचरण परंपरा तथा भगवान के स्वरूप की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि संसार में मनुष्य को मिला जीवन अत्यंत दुर्लभ है। इस जीवन को केवल सांसारिक मोह-माया में नहीं, बल्कि प्रभु के भजन, सत्संग, सेवा और सद्कर्मों में लगाना चाहिए। भगवान का नाम ही वह शक्ति है जो जीवन के अंधकार को दूर कर आत्मा को शांति प्रदान करती है।मुख्य यजमान श्री हेमंत भाई गोहिल ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि अपने स्वर्गवासी पुत्र श्री मंत्र की पावन स्मृति में हरिद्वार की पवित्र भूमि पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराना उनके परिवार के लिए श्रद्धा, आस्था और भावनाओं से जुड़ा हुआ अवसर है। उन्होंने कहा कि परमात्मा से यही प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और परिवार को इस कठिन समय में धैर्य एवं शक्ति दें। श्रीमती प्रमिला गोहिल ने कहा कि हरिद्वार की पावन गंगा और संत-महापुरुषों की कृपा से मन को शांति मिलती है। श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से अपने स्वर्गवासी पुत्र की स्मृति को प्रभु के चरणों में समर्पित करना उनके परिवार के लिए अत्यंत भावुक और पुण्यदायी क्षण है। पुत्री प्रतीक्षा गोहिल ने कहा कि भागवत कथा के प्रत्येक शब्द में भगवान की कृपा और जीवन को सही दिशा देने वाला संदेश समाहित है। उन्होंने कहा कि परिवार की ओर से आयोजित यह कथा उनके स्वर्गवासी भाई की पावन स्मृति को समर्पित है और उनकी आत्मिक शांति के लिए परिवार की श्रद्धा का प्रतीक है।इस अवसर पर कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भगवान श्रीहरि के चरणों में अपने परिवार की सुख-शांति एवं दिवंगत आत्मा की सद्गति के लिए प्रार्थना की।


