श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर उमड़ा श्रद्धा का सागर भक्ति और ज्ञान से ही सार्थक होता है मानव जीवन : डॉ. कुणाल भाई जोशी हरिद्वार
हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध ललिता आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भावपूर्ण समापन हुआ। कथा के समापन अवसर पर कथा व्यास डॉ. कुणाल भाई जोशी जी ने भक्तजनों को श्रीमद्भागवत के पावन प्रसंगों का रसपान कराते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि मनुष्य को सत्य, धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला दिव्य ग्रंथ है। भगवान के नाम का स्मरण और संतों का सानिध्य जीवन के सभी संतापों को दूर कर मनुष्य के अंत:करण को निर्मल बनाता है। उन्होंने कहा कि जिस जीवन में प्रभु की भक्ति, सेवा और सत्कर्म का समावेश हो जाता है, वही मानव जीवन वास्तव में धन्य और सार्थक बनता है। कथा समापन के अवसर पर आश्रम के मैनेजर श्री टीकम लाल जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है। भगवान की कथा हमें अपने जीवन में धर्म, प्रेम, करुणा और सद्भाव को अपनाने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि कथा के माध्यम से प्राप्त संस्कारों को जीवन में उतारना ही कथा श्रवण की सच्ची सार्थकता है। गुजरात से पधारे श्रद्धालु शांति भाई माली ने भावपूर्ण उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के प्रत्येक प्रसंग में जीवन जीने की कला और प्रभु भक्ति का संदेश छिपा है। हरिद्वार की पावन धरती पर संत-महापुरुषों के सानिध्य में कथा श्रवण करना स्वयं में सौभाग्य की बात है। शंकर सुथार भाई ने कहा कि भगवान की भक्ति मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाती है और जीवन में आने वाले दुखों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत के श्रवण से मन में शांति और आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है। केदार भाई शर्मा ने कहा कि कथा के प्रत्येक शब्द में भगवान के प्रति प्रेम और विश्वास का संदेश मिलता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में अहंकार और मोह का त्याग कर प्रभु के चरणों में समर्पित भाव से आगे बढ़ना चाहिए, तभी जीवन में सच्चे सुख और शांति की प्राप्ति संभव है। इस अवसर पर साध्वी मोहन नंद जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य के अंत:करण में भक्ति का दीप प्रज्वलित करती है। भगवान का नाम, संतों का सानिध्य और सत्संग जीवन की दिशा बदलने की शक्ति रखते हैं। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान का स्मरण और कथा-श्रवण ही मनुष्य के लिए सबसे सरल और प्रभावी साधना है।कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर भगवान श्रीहरि का आशीर्वाद प्राप्त किया। वातावरण जयकारों, भजन-कीर्तन और भक्तिमय संकीर्तन से गूंज उठा। अंत में श्रद्धालुओं ने कथा व्यास डॉ. कुणाल भाई जोशी जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके श्रीमुख से श्रीमद्भागवत का रसपान कर सभी भक्त स्वयं को धन्य अनुभव कर रहे हैं। कथा समापन के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद एवं भंडारे का भी आयोजन किया गया।


