अध्यात्म: श्री रामचरितमानस पाठ और संतों का सान्निध्य ही भाग्योदय का आधार महंत मस्त गिरी महाराज

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद श्यामपुर गली नंबर 6 स्थित प्रसिद्ध श्रीखंड कैलाश धाम में प्रातः स्मरणीय परमात्मा स्वरुप महंत मस्त गिरी जी महाराज के पतित पावन सानिध्य में रामचरित्र मानस अखंड पाठ का आयोजन शुरू हुआ इस अवसर पर बोलते हुए परमात्मा स्वरुप महंत मस्त गिरी जी महाराज ने कहा ‘बिनु सतसंग विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।’ गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रामचरितमानस की यह अर्धाली आज के भौतिकवादी युग में और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। आध्यात्मिक विद्वानों और संतों का मत है कि जब मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पुण्यों का उदय होता है, तभी उसे प्रभु की कथा और महापुरुषों के पावन दर्शन प्राप्त होते हैं। संत दर्शन: आत्मिक शुद्धि का मार्ग भारतीय संस्कृति में संतों को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया गया है क्योंकि वे ही हमें ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं। संतों का सान्निध्य केवल शारीरिक उपस्थिति नहीं है, बल्कि उनके विचारों का श्रवण और उनके आचरण का अनुसरण करना है। विद्वानों के अनुसार, संतों के दर्शन मात्र से मनुष्य के भीतर के नकारात्मक विचार (काम, क्रोध, लोभ, मोह) क्षीण होने लगते हैं और सात्विक बुद्धि का विकास होता है।रामचरितमानस: जीवन प्रबंधन का शास्त्र श्री रामचरितमानस केवल एक धर्मग्रंथ नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन की हर समस्या का समाधान है। इसका नियमित पाठ मनुष्य के अंतःकरण को निर्मल बनाता है। पारिवारिक मर्यादा: मानस हमें सिखाता है कि एक पुत्र, भाई, पति और राजा के क्या कर्तव्य हैं। मानसिक शांति: आज के तनावपूर्ण समय में मानस की चौपाइयां औषधि का कार्य करती हैं।‌ संकट निवारण: सुंदरकांड और हनुमान चालीसा जैसे अंश भक्तों को अदम्य साहस प्रदान करते हैं। कैसे पहचानें कि भाग्य का उदय हो रहा है?‌ अध्यात्मिक ग्रंथों के अनुसार, भाग्योदय के कुछ स्पष्ट लक्षण होते हैं: कथा में रुचि: यदि आपका मन अचानक प्रभु की चर्चा या कथा सुनने में लगने लगे। साधु-सेवा का भाव: दीन-दुखियों और संतों की सेवा करने की इच्छा जागृत होना।  आचरण में परिवर्तन: वाणी में मधुरता और परोपकार की भावना का बढ़ना। विशेष संदेश: “परहित सरिस धर्म नहिं भाई” के मूल मंत्र को अपनाकर यदि हम मानस का पाठ करें और महापुरुषों के वचनों को जीवन में उतारें, तो न केवल हमारा स्वयं का कल्याण होगा, बल्कि समाज में भी समरसता और शांति का प्रसार होगा।

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