श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की अनुपम महिमा से गुंजायमान हुआ कामधेनु लोक हरिद्वार।
हरिद्वार भूपतवाला सप्त सरोवर रोड स्थित प्रसिद्ध कामधेनु लोक में परम पूज्य कथा व्यास श्री रवि नंदन जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतर्गत श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं भक्तिरस से ओतप्रोत वर्णन किया गया। मधुर संगीत, भजन एवं दिव्य कथा प्रसंगों के माध्यम से महाराज श्री ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की अनंत महिमा का ऐसा रसपूर्ण वर्णन किया कि उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर भक्ति सागर में डूब गए।कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का मंगलमय प्रसंग आया, सम्पूर्ण पंडाल जय श्रीकृष्ण, नंद के आनंद भयो तथा हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की जैसे जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुजन भक्ति भाव में झूमते हुए भगवान के दिव्य स्वरूप का स्मरण कर आनंद विभोर हो गए।इस पावन कथा का आयोजन श्री सुनील सर्राफा जी सिरसा वालों द्वारा श्रद्धा एवं भक्ति भाव से कराया जा रहा है। कथा में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर श्रीमद्भागवत कथा का अमृतपान कर अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं।इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री पुनीत धानुका ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध तीर्थ नगरी हरिद्वार में माँ गंगा के पावन तट पर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना अत्यंत दुर्लभ एवं सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उपदेशों से मानव जीवन में प्रेम, करुणा, सेवा, समर्पण तथा धर्म के प्रति निष्ठा का संचार होता है। ऐसी पवित्र कथा का श्रवण कर हमारा जीवन धन्य और सार्थक हो गया है।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण केवल एक अवतार नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को प्रेम और धर्म का मार्ग दिखाने वाले युगपुरुष हैं। उनकी बाल लीलाएं, गोपियों के प्रति प्रेम, भक्तों के प्रति करुणा तथा गीता का दिव्य उपदेश आज भी समस्त संसार को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कथा स्थल पर व्याप्त भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण प्रत्येक श्रद्धालु के हृदय को आनंद एवं शांति से भर रहा है।समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयघोषों के साथ कथा व्यास श्री रवि नंदन जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा कथा का पुण्य लाभ लेकर अपने जीवन को कृतार्थ माना। सम्पूर्ण वातावरण श्रीकृष्ण भक्ति और हरिनाम संकीर्तन से सराबोर रहा।



