हरिद्वार की पावन धरती पर परमधाम छतरी साहब मंदिर छुड़ानी धाम के आचार्य श्री महंत दयासागर महाराज के श्री मुख से गरीबदासीय वाणी सुनकर भक्तजनों ने अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ किया हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद भूपतवाला स्थित श्री विशुद्ध आश्रम की पावन धरा पर आयोजित गरीबदासी वाणी यज्ञ, वाणी पाठ, वाणी कथा तथा भव्य वाणी शोभायात्रा का दिव्य एवं अलौकिक दृश्य प्रत्येक श्रद्धालु के हृदय को भक्ति, श्रद्धा और आस्था से ओतप्रोत कर रहा है। प्रातः स्मरणीय गुरुदेव आचार्य श्री महंत दया सागर जी महाराज परमधाम छतरी साहिब मंदिर छुड़ानी धाम के पावन सानिध्य में जब संतवाणी की अमृतधारा प्रवाहित होती है, तब समस्त वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से स्पंदित हो उठता है और प्रत्येक भक्त स्वयं को ईश्वर के अत्यंत समीप अनुभव करता है। उनके श्रीमुख से निकले प्रेरणादायक वचन, ओजस्वी प्रवचन और हृदयस्पर्शी दृष्टांत मानव जीवन के गूढ़ रहस्यों को अत्यंत सरल और सहज रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिससे सामान्य जन भी धर्म, भक्ति और आत्मचिंतन के मार्ग को भली-भांति समझ पाता है।गुरुदेव अपने दिव्य व्याख्यानों में यह समझाते हैं कि यह मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे केवल सांसारिक भोग-विलास में व्यतीत करना इसकी महत्ता को न समझना है। वे कहते हैं कि सच्चा सुख बाहरी पदार्थों में नहीं, बल्कि अंतर्मन की शुद्धता, प्रभु स्मरण, सत्संग और सेवा में निहित है। अपने सुंदर दृष्टांतों के माध्यम से वे यह स्पष्ट करते हैं कि जैसे अंधकार को दूर करने के लिए एक दीपक ही पर्याप्त होता है, वैसे ही अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाने के लिए गुरुज्ञान का प्रकाश अत्यंत आवश्यक है। जब मनुष्य गुरु के बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन में सदाचार, संयम और भक्ति को स्थान देता है, तब उसका जीवन स्वतः ही आनंदमय और सफल बन जाता है।इस पावन अवसर पर आयोजित आचार्य गरीबदासीय वाणीवाणी यज्ञ और वाणी पाठ के दौरान जब संत गरीबदास जी महाराज की वाणी का गायन और वाचन होता है, तब ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं दिव्यता पृथ्वी पर अवतरित होकर भक्तों का मार्गदर्शन कर रही हो। वाणी कथा के माध्यम से धर्म, सत्य, प्रेम और त्याग के उच्च आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे समाज में नैतिकता और सद्भावना का संचार हो रहा है। भव्य वाणी शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह, भक्ति और समर्पण देखने योग्य होता है, जहां हर ओर जयकारों की गूंज और भक्ति रस की धारा बहती दिखाई देती है।गुरुदेव आचार्य श्री महंत दया सागर जी महाराज के श्रीमुख से निकले पावन वचन भक्तों के जीवन को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं। वे अपने उपदेशों में बार-बार इस बात पर बल देते हैं कि मनुष्य को अपने जीवन में अहंकार, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों को त्यागकर प्रेम, दया, करुणा और सेवा को अपनाना चाहिए। वे यह भी बताते हैं कि सच्चा साधक वही है, जो अपने कर्मों को पवित्र रखकर निरंतर प्रभु का स्मरण करता है और दूसरों के कल्याण के लिए तत्पर रहता है। इस अवसर पर बोलते हुए महामंडलेश्वर श्री राम मुनि महाराज ने कहाइस दिव्य आयोजन में उपस्थित होकर भक्तजन न केवल आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कर रहे हैं, बल्कि अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भी समझने का प्रयास कर रहे हैं। उनके हृदय में गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास का संचार हो रहा है, और वे अपने जीवन को धर्ममय एवं कल्याणकारी बनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इस प्रकार यह पावन वाणी यज्ञ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मजागरण, समाज सुधार और आध्यात्मिक उन्नति का एक महान माध्यम बनकर उभर रहा है, जो प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में प्रकाश, शांति और सच्चे आनंद का संचार कर रहा है। इस अवसर पर बोलते हुए उत्तराधिकारी महंत आदित्य जैतदास महाराज ने कहा गुरु जी के पावन श्री मुख से गरीबदासीय वाणी हम सब शिष्यों तथा भक्तजनों के जीवन को धन्य तथा कृतार्थ कर रही है सतगुरु देव इस पृथ्वी लोक पर साक्षात ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में हम लोगों के मार्गदर्शन हेतु अवतरित होते हैं इस अवसर पर बोलते हुए धर्माधिकारी श्री तेजस तुर तीदास ने कहा इस संसार में गुरु की महिमा से बड़ी कोई और महिमा नहीं सतगुरु तारणहार हैं सतगुरु ही मेरे राम सतगुरु परम करतार सतगुरु तारे भव पार जो भक्त सतगुरु की शरणागत हो जाते हैं उनका लोक एवं परलोक दोनों सुधर जाते हैं इस अवसर पर महंत प्रेमदास महाराज स्वामी रविंद्र दास महाराज महंत शांति प्रकाश महाराज कोतवाल राजू महाराज कोतवाल कमाल मुनि महाराज सहित अनेको मठ मंदिर आश्रमों से आये संत महापुरुष तथा भक्तजन उपस्थित थे



