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जिसके अंतर्मन में भक्ति का वास हो जाये उसका मन स्वयं तीर्थ हो जाता है महंत रामवीर दास महाराज हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद कांगड़ी गाजीवाला स्थित प्रसिद्ध नोमी डेरा आश्रम के महंत प्रातः स्मरणीय परमात्मा स्वरुप गुरु महाराज रामवीर दास महाराज ने कहा जिसके अंतर मन में भक्ति वास कर जाये और भक्ति उसके मन में बस जाये उसका मन किसी तीर्थ से काम नहीं होता और अगर आपको प्रातः ही किसी संत के दर्शन हो जाये तो आपको कई तीर्थ के दर्शन का फल प्राप्त हो जाता है क्योंकि तीर्थ के दर्शन करने के लिए आपको स्वयं चलकर जाना पड़ता है किंतु संत रूपी तीर्थ के दर्शन आपको कभी भी कहीं भी हो सकते हैं जो फल आपको तीर्थ के दर्शन से प्राप्त होता है वही फल आपको संत महापुरुषों के दर्शनों से प्राप्त हो सकता है संत महापुरुष ज्ञान की गंगा के रूप में इस पृथ्वी लोक पर भक्तों के कल्याण हेतु स्थापित है

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