परमात्मा से जुड़ने का दिव्य माध्यम है कथा का श्रवण करना स्वामी अमृतानंद महाराज हरिद्वार

हरिद्वार कांगड़ी स्थितकार्ष्णि भक्ति धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर आयोजित विशाल संत समागम का वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से पूर्ण हो उठा। कांगड़ी क्षेत्र गाजी वाला आर्य नगर में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने कथा अमृत का रसपान कर अपने जीवन को धन्य बनाया। संतों के श्रीमुख से निकली दिव्य वाणी और भक्तों के मुख से गूंजते हरिनाम संकीर्तन से सम्पूर्ण परिसर भक्तिमय हो गयाइस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रातः स्मरणीय परम पूज्य स्वामी अमृतानंद महाराज ने कहा कि जिस जीव पर भगवान की कृपा हो जाती है, उसके जीवन और भाग्य का उदय स्वतः होने लगता है। ईश्वर की अनुकम्पा के बिना मनुष्य के हृदय में सच्ची भक्ति का भाव जागृत ही नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि संसार के सभी सुख क्षणभंगुर हैं, किन्तु भगवान की भक्ति ही वह अमृत है जो जीव को शांति, आनंद और मोक्ष का मार्ग प्रदान करती है। स्वामी जी ने अपने ओजस्वी एवं करुणामयी वचनों में कहा कि जब मनुष्य अहंकार, द्वेष और मोह को त्यागकर पूर्ण श्रद्धा से प्रभु की शरण में आता है, तभी उसके जीवन में वास्तविक परिवर्तन प्रारम्भ होता है। श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य माध्यम है। कथा श्रवण से मन पवित्र होता है, विचार निर्मल होते हैं और जीवन में सदाचार तथा प्रेम का संचार होता है। संत समागम के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर भक्ति रस में डूबे दिखाई दिए। वातावरण में गूंजते भजन, संतों का सान्निध्य और कथा की पावन धारा ने प्रत्येक भक्त के हृदय को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।“भक्तिर्भगवति सेवा, भक्तिर्भगवति प्रीति: भक्तिर्भगवतो मार्गः, भक्त्या सर्वं प्रसीदति॥”अर्थात् — भगवान की सेवा ही भक्ति है, भगवान में प्रेम ही भक्ति है और भगवान तक पहुँचने का श्रेष्ठ मार्ग भी भक्ति ही है; भक्ति से ही सब कुछ मंगलमय हो जाता है। इस अवसर पर महंत सत्यवृत्तानंद महाराज महंत कमलेश्वरानंद महाराज महंत दुर्गा दास महाराज महंत नागा बाबा गजेंद्र गिरी महाराज महंत मस्त गिरी महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज कोतवाल श्याम गिरी महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तजन उपस्थित थे



