पावन स्मृतियों को समर्पित श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, कबीर आश्रम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब हरिद्वार।
हरिद्वार भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध श्री कबीर आश्रम में स्वर्गीय श्री शांति स्वरूप जी अग्रवाल, श्रीमती शांति अग्रवाल एवं श्री विषम स्वरूप गर्ग जी की पावन स्मृति में श्रीमती सुमन गर्ग जी एवं उनके परिजनों द्वारा श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया। प्रथम दिवस कथा व्यास, श्री राघव जी महाराज के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा, भगवान के नाम-स्मरण तथा कथा श्रवण के आध्यात्मिक महत्व का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति के रंग में सराबोर होकर भगवान श्रीहरि के जयकारे लगाते रहे।
कथा व्यास श्री राघव जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन को सत्य, प्रेम, भक्ति और सदाचार की ओर ले जाने वाला दिव्य मार्ग है। भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के भीतर भगवान के प्रति आस्था को दृढ़ करता है और जीवन में आने वाले मोह, अहंकार तथा विकारों को दूर करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जिन पुण्य आत्माओं की स्मृति में कथा का आयोजन किया जाता है, उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही है कि उनके नाम पर धार्मिक एवं सत्कर्म किए जाएं।
इस अवसर पर श्री मनीष अग्रवाल, आबू रोड राजस्थान ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण जीवन का सौभाग्य है। पूर्वजों की पावन स्मृति में किया गया यह धार्मिक आयोजन परिवार को संस्कार, सेवा और भक्ति की प्रेरणा देता है।श्री शैलेंद्र अग्रवाल ने कहा कि भागवत कथा मनुष्य को अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराती है। भगवान का नाम और संतों का सानिध्य जीवन को नई दिशा प्रदान करता है। श्री भगवान अग्रवाल ने कहा कि पितरों और दिवंगत पुण्य आत्माओं की स्मृति में किया गया सत्कर्म परिवार के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का आधार बनता है। भागवत कथा के माध्यम से समाज में धर्म और संस्कारों का प्रकाश फैलता है। श्रीमती मीरा देवी अग्रवाल ने कहा कि भगवान की भक्ति में ही मनुष्य को सच्ची शांति प्राप्त होती है। भागवत कथा सुनने से मन निर्मल होता है और परिवार में सुख, शांति एवं सद्भाव का वातावरण बनता है।श्री योगेश अग्रवाल ने कहा कि श्रीमद्भागवत भगवान की भक्ति का अमृत है। जो व्यक्ति श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण करता है, उसके जीवन में सकारात्मक विचारों का संचार होता है और वह धर्म एवं सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ता है। श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि अपने पूर्वजों की स्मृति को धर्म और सेवा से जोड़ना भारतीय सनातन संस्कृति की सुंदर परंपरा है। भागवत कथा का यह आयोजन नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का माध्यम बनेगा।श्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि भागवत कथा हमें प्रेम, करुणा, सेवा और सदाचार का संदेश देती है। भगवान के चरणों में श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है।कथा के प्रथम दिवस श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर व्यासपीठ का पूजन किया तथा कथा का रसपान किया। वातावरण में भक्ति संगीत, भगवान श्रीहरि के जयघोष और श्रद्धा की दिव्य भावधारा देखने को मिली। आयोजन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने दिवंगत पुण्य आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके लिए मंगलकामना की। परिवारजनों ने सभी संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कथा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्मलाभ लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर पीआरडी कमांडर श्री राम जी तिवारी ने भी पूरी मुस्तादी के साथ अपनी ड्यूटी का निर्वहन करते हुए कहा जिस पर भगवान हरि की कृपा हो जाए भगवत कृपा हो जाए उसका मानव जीवन धन्य तथा सार्थक हो जाता है



