चलो चलें सतयुग कालीन भगवान शिव की तपोस्थली कुंण्डी शोटेश्वर महादेव मंदिर हरिद्वार


हरिद्वार के चंडी पुल से लगभग 12 किलोमीटर दूर, ग्राम बाहर पीली–सजनपुर पीली में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे पर्वतमालाओं की गोद में स्थित श्री कुण्डी शोटेश्वर महादेव मंदिर एक अत्यंत प्राचीन एवं दिव्य सिद्धपीठ है लोकमान्यताओं के अनुसार यह पावन स्थल सतयुगकाल से साधना, तप और शिवभक्ति का केंद्र रहा है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने यहां तपस्या की थी तथा माता पार्वती के विवाह अवसर पर उनकी दिव्य बारात भी इस क्षेत्र में कुछ समय के लिए विश्राम हेतु रुकी थी। इस पवित्र भूमि की विशेषता यह है कि समय-समय पर हुई खुदाइयों के दौरान भगवान शिव की प्राचीन कुण्डी, छत्र तथा अन्य अनेक दिव्य कलाकृतियां और पुरातात्त्विक अवशेष प्राप्त होते रहे हैं, जो इसकी प्राचीनता और आध्यात्मिक महिमा के जीवंत प्रमाण माने जाते हैं इस तपोभूमि की सेवा लगभग 50 से 60 वर्षों तक पूज्य प्रातःस्मरणीय संत राम जी महाराज ने निस्वार्थ भाव से की। आने को निर्माण कार्य जीणोद्धार कार्य कराये, लंबे समय तक आने जाने वालों की सेवा तथा मंदिर की सेवा करते रहे उनके ब्रह्मलीन होने के पश्चात उनके परम सेवाभावी शिष्य श्री संदीप शर्मा (सेवक राम) ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। उनके ब्रह्मलीन हो जाने के तत्पश्चात विधिवत चादर रस्म के माध्यम से बाल संत देवांश शर्मा को इस भगवान शिव की तपोस्थली पावन धाम का महंत एवं प्रबंधक बनाया गया, जबकि बाल संत केशव शर्मा भी भविष्य में इस सेवा परंपरा को आगे बढ़ाने में सहभागी रहेंगे। वर्तमान में परम सेवाभावी शिवभक्त साध्वी शालिनी शर्मा मंदिर की समस्त व्यवस्थाओं, पूजा-अर्चना तथा श्रद्धालुओं की सेवा में पूर्ण समर्पण के साथ निरंतर लगी हुई हैं। श्रद्धा, तपस्या, सेवा और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम यह श्री कुंडी शोटॆश्वर महादेव , मंदिर आज भी भक्तों को दिव्य शांति, आस्था और भगवान शिव की अनुकंपा का अनुभव कराता है। हर-हर महादेव। इस दिव्य शिव स्थली के दर्शन, मात्र से भक्तों के जीवन के सभी कष्ट संताप समाप्त हो जाते हैं और उनके भाग्य का उदय हो जाता है उन पर भगवान श्री गणेश माता पार्वती और भगवान शिव की विशेष कृपा बरसती, इस पावन स्थान का शिवलिंग स्वयंभू है जो इसी स्थान पर खुदाई के दौरान निकाला था भक्तों की मान्यता है कि जो इस स्थान पर आता है उसके सभी का संताप समाप्त हो जाते हैं भोलेनाथ का यह पावन स्थान सतयुग कालीन है





