श्रीमद्भागवत कथा सुनकर भक्त हुए भावविभोर, ध्रुव भक्ति का प्रसंग सुनाया हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद स्थित प्रसिद्ध श्री पावन धाम मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास श्री डॉ मुकेश पांड्या महाराज जी के श्रीमुख से भक्तों को भगवान की निष्काम भक्ति एवं अटूट श्रद्धा का महत्व बताया गया। कथा में ध्रुव महाराज के चरित्र का अत्यंत मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा गया कि जब मनुष्य दृढ़ संकल्प, विश्वास और भक्ति के साथ भगवान का स्मरण करता है, तब ईश्वर स्वयं उसके जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं। कथा व्यास ने बताया कि बालक ध्रुव ने विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान का आश्रय नहीं छोड़ा। उनकी तपस्या और अटूट निष्ठा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें ध्रुवपद प्रदान किया, जो आज भी अचल एवं अमर है। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि जीवन में आने वाले कष्टों से घबराने के स्थान पर प्रभु की शरण ग्रहण करनी चाहिए।
इस अवसर पर कथा व्यास ने यह भावपूर्ण श्लोक सुनाया “स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे। अहैतुकी अप्रतिहता ययाऽत्मा सुप्रसीदति॥” अर्थात् मनुष्य का सर्वोत्तम धर्म वही है जिससे भगवान के प्रति निष्काम और निरंतर भक्ति उत्पन्न हो तथा जिससे आत्मा को परम शांति प्राप्त हो। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर भगवान के जयकारों से वातावरण को गुंजायमान करते रहे। मंदिर परिसर में आध्यात्मिक उल्लास एवं भक्तिमय वातावरण बना रहा। अंत में सभी भक्तों ने भगवान से सुख, शांति एवं कल्याण की प्रार्थना की। यजमान डॉक्टर राकेश भाई ने कहा यह हमारा सौभाग्य है कि हमें इस विश्व प्रसिद्ध पावन नगरी हरिद्वार की पावन धरा पर इस पावन कथा का श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है यह सब भगवान श्री कृष्ण की कृपा है उन्होंने हमें इस पावन नगरी इस पावन कार्य हेतु बुलाया इस अवसर पर श्रीमती मीनाबेन भी उपस्थित थी



