श्री कृष्ण जन्म प्रकाश का वह क्षण जिसने संसार बदल दिया विश्व प्रसिद्ध कथा व्यास विदुषी देवी भवानी हरिद्वार
हरिद्वार श्री प्रेम नगर आश्रम में नेपाल से आयी विश्व प्रसिद्ध कथा व्यास विदुषी देवी भवानी ने कहा जब अत्याचारों का अंधकार धरती को ढकने लगा था, जब कंस का क्रूर शासन हर तरफ भय फैला रहा था, तब देवताओं ने स्वयं भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि वे पृथ्वी का भार हल्का करें। संसार जैसे किसी दिव्य प्रतीक्षा में था—मानो प्रकृति अपनी साँस रोककर उस शुभ क्षण का इंतजार कर रही हो।फिर वह पावन रात आई… भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी। आधी रात का समय था, आकाश में शांति थी, लेकिन वातावरण में एक अनजानी चमक। मथुरा के कारागार में, जहाँ देवकी और वसुदेव कैद थे, वहीँ अचानक दिव्य प्रकाश फैल गया।
क्षण भर में बेड़ियाँ टूट गईं, ताले खुल गए, और चारों ओर एक अलौकिक खुशबू फैलने लगी। ऐसा लगा जैसे स्वयं समय ने कदम रोक दिए हों, और उसी नील-श्याम प्रकाश के बीच देवकी के गर्भ से नंदलाला ने अवतार लिया — चित्ताकर्षक, मोहनीय, तेजस्वी।
नन्हे कृष्ण का चेहरा जैसे हजार चंद्रों की चमक अपने भीतर समेटे हुए था। देवकी और वसुदेव की आँखों में आँसू थे—दुःख के नहीं, बल्कि उस दिव्यता के जो उनके सामने लेटी थी। भगवान ने अपने चारभुज रूप में दर्शन देकर आश्वस्त किया कि वे इसी बाल रूप में संसार को आनंद और धर्म का मार्ग दिखाएँगे।वसुदेव जी ने बालक को उठाया और कारागार का द्वार अपने-आप खुल गया। कंस की सैनिक नींद में डूब गए। यमुना नदी उफान पर थी, पर जैसे ही वसुदेव ने कदम रखा, जल अपने-आप रास्ता देने लगा। शेषनाग ने आकर अपने फन फैलाए और उस दिव्य प्रसंग को छाया प्रदान की।
गोकुल में नंद बाबा के घर जाते ही मानो ब्रजभूमि खिल उठी। हवाएँ सुगंधित हो गईं, गायों ने आनंद से रंभाना शुरू कर दिया, और नंद महल में हँसी-खुशी का माहौल फैल गया। यशोदा माँ को तो पता भी न था कि आज उनके जीवन में कृष्ण जैसा नंदलाला आने वाला है—वह लाला जो आने वाले युगों-युगों तक हर दिल में राज करेगा।कृष्ण जन्म केवल एक दिव्य घटना नहीं था | वह पृथ्वी पर यह संदेश था कि—जब अंधकार बढ़ता है, तब प्रकाश जन्म लेता है। जब अन्याय फैलता है, तब धर्म नई शक्ति के साथ आता है।कन्हैया का यह अवतरण केवल देवताओं के लिए नहीं, बल्कि हर उस हृदय के लिए है जो प्रेम, भक्ति, सरलता और करुणा को जीवन का आधार बनाना चाहता है।
अष्टमी की उस रात जब, चांद भी थर्राया था,कारागार के अंधियारे में, श्यामसुंदरमुस्काया था।हवा ने थाम ली थीं सांसें, तारे झुककर देखते थे,कान्हा के जन्म का उत्सव, खुद देवता भी मनाते थे।यमुना ने भी राह बनाई, चरण पड़े जब नंदलाल के,नागशिरोमणि शेषनाग ने ढँक दिए फन अपने बालक के।जिस घर कान्हा जन्मे थे, वहाँ हर दुख पिघल जाता है,नाम जपों बस ‘श्याम’ का, मन सहज उजियारा हो जाता है। धरती पर आया प्रेम का सागर, आनंद का वह रूप अनोखा,जन्म जिसे हम कृष्ण कहें, जिसने जीवन का सार सिखाया। इस दौरान भक्त प्रहलाद की महिमा का सुंदर दृष्टांत सुनते हुए तथा विकास विदुषी देवी भवानी ने कहा जो भगवान के दास हो जाते हैं उनके हृदय में भगवान हरि स्वयं विद्यमान हो जाते हैं भक्त प्रहलाद ने असुर कुल में जन्म लेने के बाद भी देवत्व तथा ईश्वर आस्था वाली बुद्धि माता के गर्भ से ही प्राप्त की और ईश्वर भक्ति का संदेश लेकर इस धरती पर उत्पन्न हुए जब उनके पिता हिर्नाकश्पयू ने उन्हें सांपों के कुएं में डाल दिया तो उन्होंने पिता का दिया हुआ बिछौना समझकर सांपों के बीछोने पर सो गए अग्नि में जलन का प्रयास किया तो होली का अग्नि में जलकर स्वाहा हो गई और भक्त प्रहलाद अग्नि से ऐसे बाहर निकल आये जैसे वह माता की गोद से आ रहे हैं परम पूज्य स्वामी हरीकृष्ण महाराज जी ने कहा जहां धर्म का उद्घोष होता है वह सभी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है और भगवान हरि का वास हो जाता है इस अवसर परश्रीमती निधि राणा उपाध्यक्ष भाजपा पंडित राकेश उपाध्याय राष्ट्रीय नेपाल कोषाध्यक्ष रमा खड़का महासचिव सुशीला रेग्मी जोशी अध्यक्ष जयंती बिष्ट श्री बद्री प्रसाद लम्साल सलाहकार मार्गदर्शक फाउंडेशन के अध्यक्ष श्रीनयन सिंह राजपूत सलाहकार मार्गदर्शन कलम बहादुर खडका आज कथा में प्रमुख अतिथि के रूप में खेमनाथ आचार्य जी सहितभारी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे


