गुरु के श्री चरणों में समर्पित होकर ही मनुष्य अपार शांति की प्राप्ति कर सकता है श्री महंत कमलेशानन्द सरस्वती महाराज हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद खड़खड़ी स्थित प्रसिद्ध गंगा भक्ति आश्रम के परमाध्यक्ष प्रातः स्मरणीय गुरु देव श्री महंत कमलेशानन्द सरस्वती महाराज ने भक्तजनों के बीच अपने श्री मुख से उद्गार व्यक्त करते हुए कहायह एक बहुत ही गहरा और सत्य विचार है। भागदौड़ भरी इस आधुनिक दुनिया में, जहाँ हम भौतिक सुखों के पीछे भागते हैं, अक्सर अपने मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य को भूल जाते हैं।
आध्यात्मिक गुरु: मन की शांति और जीवन के सच्चे मार्गदर्शक
मनुष्य का मस्तिष्क एक बहती हुई नदी के समान है, जो कभी शांत रहता है तो कभी विचारों के वेग से अशांत हो जाता है। जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मन और मस्तिष्क को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए आध्यात्मिक खुराक की आवश्यकता होती है।
परिवर्तनशील मन और ईश्वर की अनुभूतिहमारा मन सदैव एक समान नहीं रहता। सुख में यह प्रफुल्लित होता है, तो दुख में संशय और निराशा के अंधकार में डूब जाता है। इस अस्थिरता के बीच, ईश्वर की अनुभूति वह लंगर है जो हमें डूबने से बचाता है। जब हम उस परम शक्ति से जुड़ते हैं, तो हमारे भीतर एक अदृश्य शक्ति का संचार होता है जो हमें कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहना सिखाती है।
गुरु चरणों में पावन वचन का महत्वसंसार के शोर में जब हम स्वयं को खोने लगते हैं, तब गुरु के प्रेरणादायी शब्द मरहम का काम करते हैं। गुरु के मुख से निकले पावन वचन केवल शब्द नहीं, बल्कि वे मंत्र हैं जो सीधे आत्मा को स्पर्श करते हैं।
सुकून का अनुभव: गुरु के सानिध्य में मन का बोझ हल्का हो जाता है।सत्य का बोध: गुरु हमें सिखाते हैं कि शांति बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर ही व्याप्त है। इस अवसर पर बोलते हुए प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री महंत कमलेशानन्द सरस्वती महाराज ने कहा
प्रेरणा का स्रोत: उनके शब्द हमें अंधकार से प्रकाश की ओर (तमसो मा ज्योतिर्गमय) ले जाते हैं।आध्यात्मिक गुरु: सच्चे पथ-प्रदर्शकइस पृथ्वी लोक पर आध्यात्मिक गुरु ही हमारे वास्तविक मार्गदर्शक हैं। वे एक अनुभवी वैद्य की तरह हमारे मानसिक विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह) को पहचानकर उनका निदान करते हैं। आध्यात्मिकता का ज्ञान हमें यह सिखाता है कि: जीवन का उद्देश्य केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि स्वयं को जानना है।तन की स्वच्छता के साथ-साथ मन की निर्मलता अनिवार्य है। सच्चा सुख दूसरों की सेवा और आंतरिक संतोष में निहित हैस्वस्थ तन और शांत मन के लिए गुरु के मार्गदर्शन में आध्यात्मिकता को अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। गुरु के चरणों में समर्पित होकर ही हम उस शांति को प्राप्त कर सकते हैं, जिसकी खोज में हम जीवनभर भटकते रहते हैं। गुरुदेव हमारे जीवन में एक सुखद अनुभूति के रूप में हमारे समक्ष होते हैं जिनके मार्गदर्शन हमारे जीवन को दिशा प्रदान करता है और बुलंदियों के शिखर पर पहुंचा देता है हर मुश्किल से मुश्किल घड़ी में गुरु का मार्गदर्शन हमें सही मार्ग प्रदर्शित करता है




