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श्रद्धा और भक्ति से ही मिलता है प्रभु का सान्निध्य : अशोक शास्त्री जी महाराज हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद श्रवण नाथ नगर स्थित सेवा समिति हॉल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में देश के प्रख्यात कथा व्यास अशोक शास्त्री जी महाराज के श्रीमुख से कथा के दूसरे दिन भक्तों ने भक्ति एवं ज्ञान की अमृत वर्षा का रसपान किया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर भगवान की दिव्य लीलाओं का श्रवण कर भाव-विभोर हो गए।कथा व्यास अशोक शास्त्री जी महाराज ने कहा कि संसार में मनुष्य चाहे कितना भी ज्ञान, धन और वैभव प्राप्त कर ले, किंतु यदि उसके हृदय में भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति नहीं है तो उसका जीवन अधूरा है। उन्होंने भक्त ध्रुव के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि बालक ध्रुव ने विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान का स्मरण नहीं छोड़ा। कठोर तपस्या और अटूट विश्वास के बल पर उन्होंने भगवान श्रीहरि के साक्षात दर्शन प्राप्त किए। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में आयु, स्थिति अथवा सामर्थ्य बाधक नहीं होती, केवल दृढ़ संकल्प और समर्पण की आवश्यकता होती है। महाराज श्री ने कहा कि जब भक्त पूर्ण विश्वास के साथ भगवान का आश्रय ग्रहण करता है, तब प्रभु स्वयं उसके जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं। कथा के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु “जय श्री हरि” तथा “राधे-राधे” के जयघोष से झूम उठेकथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने महाराज श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा धर्म, भक्ति और सत्संग के महत्व को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर अपने जीवन को धर्ममय बनाने का आह्वान किया।

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