पितृपक्ष में संत भंडारे से ब्रह्मलीन शांतानंद महाराज को श्रद्धांजलि संत-महापुरुषों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन, गुरु स्मृति को बताया धर्म और सेवा की प्रेरणा हरिद्वार

हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद खड़खड़ी स्थित प्रसिद्ध श्री जगदीश आश्रम ट्रस्ट में आश्रम के महंत परम पूज्य स्वामी योगेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज के पतित पावन सानिध्य में प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान ब्रह्मलीन शांतानंद महाराज की पावन स्मृति में पितृपक्ष के अवसर पर विशाल संत भंडारे का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया गया। भंडारे में संत-महापुरुषों एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर ब्रह्मलीन संत को श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर महंत योगेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि पितृपक्ष केवल पूर्वजों के स्मरण का पर्व नहीं, बल्कि उनके बताए संस्कारों, सेवा और सद्कर्मों को अपने जीवन में धारण करने का अवसर है। संत-महापुरुषों की स्मृति में किया गया अन्नदान, सेवा और संत सत्कार आत्मिक शांति प्रदान करता है तथा समाज को धर्म और मानव सेवा की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन शांतानंद महाराज का जीवन त्याग, तपस्या, साधना और मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा, उनकी पावन स्मृति सदैव संत समाज और भक्तों का मार्गदर्शन करती रहेगी। महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद महाराज ने कहा कि संतों की स्मृति में होने वाला भंडारा सनातन संस्कृति की सेवा और श्रद्धा का प्रतीक है। संतों के आदर्शों को जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। महंत दिनेश दास महाराज ने कहा कि पितृपक्ष में संत सेवा और अन्नदान का विशेष महत्व है। सेवा के माध्यम से पूर्वजों का स्मरण करने से परिवार में संस्कार और धर्म की परंपरा मजबूत होती है। महंत कमलेशानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि संतों का जीवन समाज को भक्ति, सेवा और सदाचार की राह दिखाता है। ब्रह्मलीन शांतानंद पीहू महाराज की पावन स्मृति भक्तों को सदैव धर्ममार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी। स्वामी विवेकानंद महाराज ने कहा कि संतों की वाणी और उनके संस्कार समाज की अमूल्य धरोहर हैं। पितृपक्ष में संतों का स्मरण और सेवा करना हमारी सनातन परंपरा को जीवंत रखने का श्रेष्ठ माध्यम है महंत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जहां संत सेवा, अन्नदान और प्रभु स्मरण होता है, वहां वातावरण स्वतः ही आध्यात्मिक हो जाता है। ब्रह्मलीन संतों की स्मृति में किए गए सत्कर्म उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प हैं इस दौरान संत-महापुरुषों ने ब्रह्मलीन शांतानंद पीहू महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। भंडारे में बड़ी संख्या में संत, महंत, श्रद्धालु एवं भक्तजन शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।



