गुरु भगवान महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव महाराज ने कहा महामंडलेश्वर सुरेश मुनि जी महाराज जैसे पावन संत लोक कल्याण के लिए, सदैव धर्मकर्म जैसे कार्यों को समर्पित रहते हैं हरिद्वार


हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध स्वतः मुनि आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ के पावन समापन अवसर पर प्रातःस्मरणीय, साक्षात् परमात्मा स्वरूप पूज्य श्री करौली शंकर महाराज ने अपने दिव्य आशीर्वचनों में कहा कि परम पूज्य महामंडलेश्वर श्री 1008 स्वामी सुरेश मुनि जी महाराज के पावन सान्निध्य में श्रीमद्भागवत कथा रूपी अमृतधारा प्रवाहित हो रही है, जिससे असंख्य श्रद्धालुओं के जीवन में धर्म, भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य का दिव्य आलोक प्रस्फुटित हो रहा है। उन्होंने कहा कि संत-महापुरुषों का सम्पूर्ण जीवन लोकमंगल, राष्ट्रकल्याण एवं मानवता की निःस्वार्थ सेवा के लिए समर्पित रहता है। वे अपने तप, त्याग, साधना और आध्यात्मिक तेज से समाज को सत्य, प्रेम, करुणा, सदाचार एवं ईश्वर-भक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। संतों का पावन सान्निध्य मनुष्य के अंतःकरण को निर्मल बनाकर उसे आत्मकल्याण एवं परमात्मा की प्राप्ति की ओर अग्रसर करता है। इस पावन अवसर पर परम पूज्य महामंडलेश्वर, प्रातःस्मरणीय गुरु भगवान श्री 1008 स्वामी सुरेश मुनि जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में गुरु-तत्त्व की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु ही वह दिव्य शक्तिहैं,जोअज्ञानरूपीअंधकार का नाश कर जीव को ज्ञान, भक्ति, सेवा और मोक्ष के पथ पर अग्रसर करते हैं। गुरु की कृपा के बिना आत्मज्ञान एवंईश्वर-साक्षात्कार का मार्ग कठिन है। गुरु ही जीवन के सच्चे मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत एवं आध्यात्मिक उन्नति के आधार हैं।परम पूज्य महंत नरोत्तम दास जी महाराज (नरोत्तम मुनि जी महाराज) ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि गुरु का स्थान समस्त देवताओं से भी श्रेष्ठ माना गया है। गुरु की शरण में आने वाला प्रत्येक साधक धर्म, संयम, सेवा, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना से आलोकित होकर अपने जीवन को धन्य बनाता है।इस अवसर पर ज्ञान गौदडी पीठाधीश्वर परम पूज्य स्वामी कल्याण देव जी महाराज ने भी अपने ओजस्वी एवं प्रेरणामयी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, प्रेम, भक्ति, सदाचार एवं राष्ट्रसेवा के आदर्शों से जोड़ने का दिव्य माध्यम है। कथा श्रवण से मन की पवित्रता, आत्मबल, संस्कार एवं ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा का विकास होता है। समापन अवसर पर भजन, कीर्तन एवं सत्संग से संपूर्ण आश्रम भक्तिमय वातावरण मे सराबोर हो गया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने संत-महापुरुषों का आशीर्वाद प्राप्त कर धर्म, सेवा, सदाचार, गुरु-भक्ति एवं राष्ट्रहित के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। सम्पूर्ण वातावरण ‘जय श्रीमद्भागवत’, ‘जय गुरुदेव’ तथा ‘हरि नाम संकीर्तन’ से गुंजायमान होकर आध्यात्मिक उल्लास और दिव्य चेतना से ओतप्रोत हो उठा। इस अवसर पर महंत कमलेशानंद सरस्वती महंत, रवि देव महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तजन उपस्थित थे



