श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस पर भगवान इन्द्र के प्रसंग से मिला अहंकार त्याग और भक्ति का संदेश हरिद्वार


हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद ऋषिकेश। कोयल घाटी स्थित श्री वृंदावन आश्रम, बड़ी सब्जी मंडी के निकट, वीरभद्र रोड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा एवं भक्ति ज्ञान यज्ञ मंगल महोत्सव के सप्तम दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में प्रातः से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष एवं भजनों से भक्तिमय बना रहा।कथा व्यास श्री राकेश कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने अपने श्रीमुख से भगवान इन्द्र के प्रसंग का अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जब देवराज इन्द्र को अपने वैभव और शक्ति का अभिमान हुआ, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा के माध्यम से उनका अहंकार दूर कर संसार को यह संदेश दिया कि ईश्वर की शरण में रहने वाला भक्त सदैव सुरक्षित रहता है। उन्होंने कहा कि विनम्रता, सेवा, श्रद्धा और भक्ति ही जीवन को सफल एवं कल्याणकारी बनाती है। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण को गुंजायमान करते रहे इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य आयोजक सुखबीर सिंह प्रधान एवं श्रीमती सुमंत देवी ने सभी श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कथा के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी भक्तों का आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम में विजेंद्र चौहान, मंजू देवी, श्री श्याम सिंह, सुनील प्रधान, जयपाल सिंह, आनंदपाल चौहान, मदन चौहान, रोहतास चौहान, रणवीर सिंह प्रधान सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कथा उपरांत संत-महापुरुषों एवं श्रद्धालुओं ने विशाल भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त , किया


