श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की दिव्य लीला सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु हरिद्वार।

हरिद्वार कनखल संन्यास रोड स्थित प्रसिद्ध श्री स्वरूपानंद संन्यास आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास परम पूज्य पंडित संदीप आत्रेय महाराज के श्रीमुख से भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण एवं मनोहारी वर्णन किया गया। जैसे ही कथा में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का प्रसंग आया, पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु श्रीकृष्ण की महिमा का श्रवण कर भक्ति रस में सराबोर होकर झूमने, नृत्य करने और भजन-कीर्तन में लीन हो गए। कथा व्यास पंडित संदीप आत्रेय महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म का सुंदर दृष्टांत सुनाते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान स्वयं धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। मथुरा की कारागार में देवकी और वसुदेव के घर अर्धरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य प्राकट्य हुआ। उस समय कारागार के बंधन स्वतः खुल गए, पहरेदार गहरी निद्रा में सो गए और यमुना जी ने भी वसुदेव जी को मार्ग प्रदान किया। यह प्रसंग दर्शाता है कि जब ईश्वर की कृपा होती है तो जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं भी स्वतः दूर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण केवल एक अवतार नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा, धर्म और मानवता के आदर्श हैं। उनके जीवन से हमें सत्य, कर्तव्य और निष्काम कर्म का संदेश प्राप्त होता है। कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े हर्षोल्लास एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की जैसे भजनों पर नृत्य कर उत्सव का आनंद लिया। इस अवसर पर कथा आयोजक परिवार के सदस्य श्री अमित कुमार शर्मा, श्री अवधेश कुमार शर्मा, श्री उमेश शर्मा, श्री हेमंत शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के संगीतमय संचालन में श्री प्रद्युम्न शर्मा (ज्वालापुर) ने अपनी मधुर प्रस्तुति से वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। संत समाज एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा को बढ़ाया। संपूर्ण आश्रम परिसर श्रीकृष्ण भक्ति और जयघोषों से गुंजायमान रहा।

Related Articles

Back to top button