गोवर्धन पूजा का दिव्य प्रसंग सुन भक्त हुए भावविभोर, चित्रकूट अखंड आश्रम में उमड़ा श्रद्धा का सागर हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध चित्रकूट अखंड आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान महायज्ञ के दौरान कथा व्यास पूज्य नीलकंठ भाई वडिया के श्रीमुख से भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन पूजा का दिव्य एवं भावपूर्ण प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भक्तजन भावविभोर हो उठे। कथा के दौरान आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा तथा श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर कथा अमृत का रसपान करते रहे।कथा व्यास नीलकंठ भाई वडिया ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को प्रकृति, गौसेवा और धर्म के महत्व का संदेश देते हुए इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का आह्वान किया था। इससे क्रोधित होकर देवराज इंद्र ने मूसलाधार वर्षा कर ब्रजवासियों को संकट में डाल दिया, किंतु भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि जो व्यक्ति भगवान की शरण में रहता है, उसके सभी संकट स्वयं प्रभु हर लेते हैं।उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, गौसंवर्धन एवं सामूहिक एकता का भी महान संदेश देती है। भगवान श्रीकृष्ण का यह दिव्य चरित्र भक्तों के जीवन में श्रद्धा, विश्वास और सेवा भावना का संचार करता है।इस अवसर पर कथा के मुख्य आयोजक महेश भाई ठाकर एवं महादेव टूर्स परिवार ने उपस्थित श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तजन उपस्थित रहे और सभी ने कथा का पुण्य लाभ प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य एवं कृतार्थ बनाया। अंत में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों तथा आरती के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।




