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झालावाड़ गुजरात आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, भक्तजन भक्ति एवं ज्ञान की गंगा में हुए सराबोर हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। पावन तीर्थनगरी हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध झालावाड़ गुजरात आश्रम में प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री महंत योग गुरु डॉ. साधनानंद जी महाराज के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। कथा के प्रथम दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा अमृत का पान कर अपने जीवन को धन्य एवं कृतार्थ बनाया। भक्तजन निरंतर ज्ञान, भक्ति एवं वैराग्य की गंगा में गोते लगाते हुए प्रभु स्मरण में लीन दिखाई दिए। कथा व्यास पूज्य महाराज श्री ने अपने दिव्य प्रवचनों में श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ का श्रवण नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य माध्यम है। उन्होंने श्लोक उद्धृत करते हुए कहा— “स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे। अहैतुक्यप्रतिहता ययात्मा सुप्रसीदति॥” अर्थात मनुष्य का सर्वोत्तम धर्म वही है जिससे भगवान के प्रति निष्काम एवं अखंड भक्ति उत्पन्न हो तथा आत्मा को परम शांति प्राप्त हो। प्रथम दिवस पर महाराज श्री ने एक सुंदर दृष्टांत सुनाते हुए बताया कि जिस प्रकार अंधकार को दूर करने के लिए दीपक की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार जीवन के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करने के लिए भगवान की कथा, सत्संग और संतों का सान्निध्य आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मानव जीवन को सही दिशा प्रदान कर उसे प्रभु चरणों की ओर अग्रसर करती है। इस पावन कथा का आयोजन मुंबई से पधारे श्रद्धालु श्री ओमकार भाई, श्री विशाल भाई एवं उनके पूज्य पिता श्री गोपाल भाई वैगढ परिवार द्वारा श्रद्धा एवं भक्ति भाव से कराया जा रहा है। परिवारजनों ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन उनके जीवन का परम सौभाग्य है तथा वे इसे भगवान श्रीकृष्ण एवं गुरुदेव की कृपा का प्रतिफल मानते हैं। आश्रम का वातावरण हरिनाम संकीर्तन, भजन एवं कथा रस से पूर्णतः भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालुओं ने कथा के प्रथम दिवस का श्रवण कर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का संकल्प लिया तथा आगामी दिनों में कथा से और अधिक आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने की कामना व्यक्त की। समस्त वातावरण “जय श्रीकृष्ण” एवं “हरि बोल” के जयघोष से गुंजायमान रहा।

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