जब जीवन में धर्म संयम और ईश्वर की भक्ति का समावेश होता है तब ग्रहस्त जीवन ही तप और साधना का स्वरूप धारण कर लेता है कथा व्यास पंडित नंदू जी महाराज जाजड़ा हरिद्वार
हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद प्रसिद्ध भूपतवाला क्षेत्र स्थित मुकमी भवन, श्रीमती लक्ष्मी नारायणी देवी धर्म सेतु ट्रस्ट में 1 जून 2026 से 7 जून 2026 तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के अंतर्गत कथा व्यास प्रातः स्मरणीय परम पूज्य ज्योतिर्विद पंडित नंदू जी महाराज जाजड़ा के श्रीमुख से भक्तजन दिव्य एवं अलौकिक कथाओं का रसास्वादन कर रहे हैं। कथा के दौरान महाराज श्री ने महर्षि कर्दम और माता देवहूति के पावन विवाह प्रसंग का अत्यंत मार्मिक एवं शास्त्रसम्मत वर्णन करते हुए बताया कि जब जीवन में धर्म, संयम और ईश्वर भक्ति का समावेश होता है, तब गृहस्थ जीवन भी तप और साधना का स्वरूप धारण कर लेता है।महाराज श्री ने कहा कि माता देवहूति ने राजवैभव का त्याग कर अपने पति महर्षि कर्दम की सेवा को ही अपना परम धर्म माना। उनकी निष्काम सेवा, समर्पण और पतिव्रता धर्म से प्रसन्न होकर महर्षि कर्दम ने उन्हें दिव्य सुखों की प्राप्ति कराई। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सेवा, श्रद्धा और त्याग से ही ईश्वर कृपा का मार्ग प्रशस्त होता है।कथा के मध्य भावविभोर करते हुए महाराज श्री ने बताया कि विवाह के समय ही महर्षि कर्दम ने यह संकल्प लिया था कि संतान उत्पन्न होने के पश्चात वे गृहस्थ आश्रम का त्याग कर संन्यास आश्रम में प्रवेश करेंगे। यह सुनकर माता देवहूति ने भी धर्म के इस महान आदर्श को सहर्ष स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि सच्चे ऋषि और महापुरुष संसार में रहते हुए भी उससे आसक्त नहीं होते, अपितु अपने प्रत्येक कर्म को भगवान की आज्ञा मानकर पूर्ण करते हैं।महाराज श्री ने आगे वर्णन किया कि भगवान की कृपा से माता देवहूति के गर्भ से स्वयं भगवान कपिलदेव ने अवतार धारण किया, जिन्होंने संसार को सांख्य दर्शन का अमूल्य ज्ञान प्रदान किया। इस प्रसंग का श्रवण करते हुए कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और भक्ति के अश्रुओं से नम हो उठीं। संपूर्ण वातावरण “हरि नाम” के मधुर संकीर्तन से गुंजायमान हो गया तथा भक्तजन भगवान की भक्ति रसधारा में डूबकर अपने जीवन को धन्य एवं कृतार्थ अनुभव करने लगे।विश्व प्रसिद्ध पावन नगरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र स्थित मुकमी भवन, श्रीमती लक्ष्मी नारायणी देवी धर्म सेतु ट्रस्ट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के दौरान यजमान श्री राधेश्याम जी एवं श्रीमती उमा देवी जी, श्री बाबूलाल जी एवं श्रीमती मीना देवी जी, श्री अशोक जी एवं श्रीमती जुगल जी अग्रवाल तथा श्री बनवारी लाल जी एवं श्रीमती यशोदा जी ने अपने भावपूर्ण उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि देवभूमि हरिद्वार में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना मनुष्य जीवन का परम सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि गंगा तट पर संतों की पावन सन्निधि में भगवान की कथा सुनने का अवसर अनेक जन्मों के पुण्यों के फलस्वरूप ही प्राप्त होता है।
यजमान परिवार ने भावविह्वल होकर कहा कि कथा व्यास परम पूज्य ज्योतिर्विद पंडित नंदू जी महाराज जाजड़ा के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला दिव्य आध्यात्मिक महायज्ञ है। कथा के प्रत्येक प्रसंग से हृदय में भक्ति, वैराग्य और सेवा का भाव जागृत हो रहा है तथा जीवन को धर्ममय बनाने की प्रेरणा प्राप्त हो रही है।उन्होंने कहा कि हरिद्वार की पुण्यभूमि पर संतों के श्रीमुख से भगवान की कथा का श्रवण करना ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं भगवान की कृपा अमृतधारा बनकर हृदय में प्रवाहित हो रही हो। कथा के माध्यम से समस्त श्रद्धालु अपने जीवन को पवित्र, संस्कारित एवं प्रभुमय बनाने का संकल्प ले रहे हैं। यजमान परिवार ने सभी भक्तजनों से अधिकाधिक संख्या में पहुंचकर इस दिव्य कथा रसामृत का पान करने तथा अपने जीवन को धन्य बनाने का आग्रह भी किया।

