भगवान राम का नाम ही एक ऐसी निधि है जो इस लोक में भी काम आती है और परलोक में भी काम आती है महंत जय रामदास महाराज हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद श्री वशिष्ठ दूधाधारी सप्तऋषि आश्रम स्थित श्री संकटमोचन ग्यारह मुखी हनुमान मंदिर, ब्रह्मपुरी में अधिक मास के पावन अवसर पर प्रातः स्मरणीय श्री महंत जयराम दास जी महाराज के पावन सान्निध्य में एक विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ओंकारेश्वर पहरी आश्रम से पधारे श्रद्धेय महंत श्री कृपासिंधु दास जी महाराज ने अधिक मास की महिमा का वर्णन करते हुए भगवान श्रीराम की अनंत महिमा का भी भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम मर्यादा, सत्य, धर्म, करुणा एवं आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। श्रीराम के चरित्र का स्मरण मात्र ही मनुष्य के जीवन को पवित्र एवं मंगलमय बना देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया तथा अधिक मास को प्रभु भक्ति, नाम जप, सत्संग और सेवा के लिए अत्यंत शुभ बताया। महंत जयराम दास जी महाराज ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु ही जीव को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ईश्वर प्राप्ति का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने अधिक मास में धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य एवं प्रभु स्मरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। विशाल संत भंडारे में संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। संपूर्ण वातावरण श्रीराम नाम के जयघोष, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास से गूंजायमान रहा। महामंडलेश्वर श्याम दास महाराज ने कहा भगवान राम की कृपा अनंत है जिस पर हो जाए उसके जीवन का उद्धार हो जाता है इस अवसर पर बोलते हुए महंत सूरज दास महाराज ने कहा जो सुख भगवान राम के भजन से प्राप्त होता है वह कहीं और प्राप्त नहीं हो सकता महंत गणेश दास महाराज ने कहा भगवान राम मर्यादाओं के स्वामी है उन्होंने संपूर्ण विश्व को मर्यादा के रूप में बांधते हुए सनातन परंपरा स्थापित की जो आज संपूर्ण विश्व में सनातन संस्कृति के रूप में प्रवाहित हो रही है इस अवसर पर महंत सूरज दास महाराज, महंत रघुबीर दास महाराज, महंत कृपासिंधु दास महाराज, स्वामी रामचरण दास महाराज, महंत तीर्थ सिंह जी, संत निहाल सिंह महाराज महंत बिहारी शरण महाराज स्वामी अंकित शरण महाराज सहित अनेक संत-महात्मा एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम बन गया। इस अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे में सभी संत महापुरुषों तथा भक्त जनों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया



