29वें श्री गुरु प्रेम स्मृति सम्मेलन में, संत महापुरुषों के श्री मुख से हुई ज्ञान की वर्षा भंडारे में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद हरिद्वार।

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद भूपतवाला स्थित श्री निजात्म प्रेम धाम ट्रस्ट में प्रातः स्मरणीय परम पूज्य गुरु भगवान निजात्म पीठाधीश्वर, अनंत विभूषित महामंडलेश्वर परम पूज्य गुरुदेव स्वामी गुरु प्रेमानंद जी महाराज ‘ प्रेममूर्ति जी’ की पुण्य स्मृति में 29वां श्री गुरु प्रेम स्मृति सम्मेलन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम प्रातः स्मरणीय परम पूज्य गुरु भगवान महामंडलेश्वर स्वामी शिव प्रेमानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित हुआ, जिसमें विशाल संत समागम एवं भंडारे का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी शिव प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि गुरु की स्मृति केवल किसी एक व्यक्ति के जीवन का स्मरण नहीं, बल्कि उनके बताए हुए सेवा, साधना, त्याग और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है। गुरु कृपा से ही मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का प्रकाश होता है और समाज में प्रेम, करुणा तथा सेवा की भावना मजबूत होती है। उन्होंने संत परंपरा को सनातन संस्कृति की आधारशिला बताते हुए श्रद्धालुओं से धर्म एवं मानव सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं पंचायती श्री महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्री महंत रविंद्र पुरी जी महाराज ने कहा कि गुरुजनों की पुण्य स्मृति में आयोजित ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को संस्कार और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं। संतों का सानिध्य मनुष्य के जीवन को सही दिशा देता है और सनातन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि सेवा, साधना और सद्भाव ही संत समाज का मूल संदेश है महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि गुरु का जीवन स्वयं में एक प्रेरणादायी ग्रंथ होता है। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। संत समागम जैसे आयोजन आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने के साथ समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को भी बढ़ावा देते हैं।महामंडलेश्वर स्वामी गिरधर गिरी जी महाराज ने कहा कि गुरु चरणों में श्रद्धा और विश्वास रखने वाला साधक जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोता। गुरु कृपा मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा और परोपकार को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। स्वामी शारदा गिरी जी महाराज ने कहा कि संतों की वाणी समाज को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। गुरु स्मृति समारोह आध्यात्मिक परंपराओं को जीवंत रखने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि मानव सेवा ही ईश्वर सेवा का श्रेष्ठ स्वरूप है और प्रत्येक व्यक्ति को जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। परम पूज्य महंत स्वामी ज्ञान प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारना है। गुरु प्रेम, करुणा और सद्भाव का संदेश देते हैं, जिसे समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को नियमित साधना, सत्संग और सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।प्रबंधक आचार्य श्री लव पुरी जी महाराज ने कहा कि श्री गुरु प्रेम स्मृति सम्मेलन का उद्देश्य गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ समाज को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना है। संतों के आशीर्वचन श्रद्धालुओं के लिए जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा हैं। उन्होंने आयोजन में सहयोग करने वाले सभी संतों, श्रद्धालुओं एवं सेवाभावी लोगों का आभार व्यक्त किया।आचार्य कुश पुरी जी महाराज ने कहा कि गुरु की कृपा से जीवन में ज्ञान, भक्ति और विवेक का संचार होता है। गुरु स्मृति में आयोजित संत समागम से श्रद्धालुओं को संतों का सानिध्य और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त होता है। उन्होंने सभी से सनातन संस्कृति, सेवा और सद्भावना के मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में संत-महात्माओं के पावन सानिध्य में श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में श्रद्धा अर्पित की। इसके उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें संतों एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे कार्यक्रम का वातावरण गुरु भक्ति, श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत रहा। अब ये तो अपना ही था ना इस अवसर पर आश्रम के गुरु भक्त, प्रेम स्वरूप भाटिया, सुरजीत कपूर, राजीव बंसल सुरेश कोछड एवं नंगली दरबार का समस्त संत समाज उपस्थित रहा

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