श्रद्धा और समर्पण से ही होती है ईश्वर की प्राप्ति : दीपक महाराज छोटे डोंगरे जी महाराज हरिद्वार

हरिद्वार ठाकुर मनोज मनोजानंद जयराम आश्रम नंबर दो में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिवस पर कथा व्यास दीपक महाराज छोटे डोंगरे जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति और समर्पण का दिव्य संदेश प्रदान किया। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य के हृदय में भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास और पूर्ण समर्पण का भाव उत्पन्न नहीं होता, तब तक ईश्वर की सच्ची प्राप्ति संभव नहीं है। भक्ति ही वह दिव्य सेतु है जो जीव को परमात्मा से जोड़ती है। कथा के चौथे दिन महाराज श्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं तथा गोपियों के निष्काम प्रेम का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि भगवान बाहरी आडंबरों से नहीं, बल्कि भक्त के निर्मल हृदय और सच्ची भावना से प्रसन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गोपियों ने अपने सर्वस्व को भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया था, उसी प्रकार मनुष्य को भी अहंकार, लोभ और मोह का त्याग कर प्रभु की शरण ग्रहण करनी चाहिए। भगवान के प्रति अटूट प्रेम और विश्वास ही जीवन को सार्थक बनाता है।कथा के दौरान भजनों और संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भक्तजन कथा श्रवण कर भक्ति रस में भावविभोर हो गए तथा भगवान के जयकारों से आश्रम परिसर गूंज उठा।इस अवसर पर मुख्य रूप से जीतू भाई, चिराग भाई रावल सहित गुजरात से पधारे अनेक श्रद्धालु भक्तजन उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में भक्तजन पावन धर्मनगरी हरिद्वार पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कर रहे हैं तथा आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने महाराज श्री के श्रीमुख से निकले अमृतमय वचनों का श्रवण कर अपने जीवन को धन्य बताया।



