गुरु कृपा और संत महिमा से आलोकित हुआ सुदर्शन आश्रम अखाड़ा तपोमूर्ति देव स्वरूप संतों की हमेशा से रहा तपो स्थली 35वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा श्रद्धा का सागर हरिद्वार

हरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद पावन तीर्थ में स्थित श्री सुदर्शन आश्रम अखाड़े में प्रातः स्मरणीय परम वंदनीय परम पूज्य गुरु भगवान श्री श्री 1008 महंत सरस्वत्याचार्य जी महाराज की 35वीं वार्षिक पुण्यतिथि अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ संत महापुरुषों के दिव्य सानिध्य में मनाई गई। समूचा आश्रम भक्ति, आस्था और गुरु स्मरण की पावन ऊर्जा से आलोकित दिखाई दिया, जहां श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित कर आत्मिक शांति का अनुभव किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं पंचायती श्री महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्री महंत रवींद्र पुरी जी महाराज उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता गुरु मंडल आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर श्री भगवत स्वरूप जी महाराज ने की। अपने उद्बोधन में महंत रवींद्र पुरी जी महाराज ने कहा कि सुदर्शन आश्रम अखाड़ा तप, त्याग और साधना की जीवंत परंपरा का प्रतीक है, जहां साकेतवासी पूज्य गुरुदेव साक्षात देवत्व स्वरूप होकर विराजमान रहे और भक्तों को कल्याण का पथ प्रदर्शित करते रहे।कार्यक्रम में संत महापुरुषों के दिव्य विचारों की अमृतवर्षा हुई। परम पूज्य गुरुदेव परमात्मा स्वरुप श्री महंत रघुवीर दास जी महाराज ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं, बल्कि जीवन रूपी नौका के सच्चे खेवैया होते हैं, जो भक्त को भवसागर से पार लगाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस जीवन में गुरु का सानिध्य और कृपा होती है, वहां अज्ञान का अंधकार स्वतः ही समाप्त हो जाता है।महंत सूरज दास महाराज ने भगवान राम के भजन और भक्ति की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि राम नाम में ऐसी शक्ति है, जो मनुष्य के जीवन को सरल, पवित्र और आनंदमय बना देती है। श्री महंत बिहारी शरण महाराज ने राम नाम को कलियुग का सबसे सरल और प्रभावी साधन बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से राम का स्मरण करता है, उसके सभी कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं।
श्री महंत जयरामदास महाराज ने गुरु की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु वह दिव्य दीपक हैं, जो जीवन के अंधकार को दूर कर सत्य के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री महंत महामंडलेश्वर श्याम दास जी महाराज ने संत महापुरुषों की अनंत महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि संतों का जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत होता है, जिनके आशीर्वाद से मानव जीवन धन्य हो जाता है।स्वामी अंकित शरण महाराज ने राम नाम की महिमा पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राम नाम केवल शब्द नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम बनती है। महंत हरेंद्र दास महाराज ने कहा कि सच्चा संत वही है, जो अपने जीवन से त्याग, सेवा और प्रेम का संदेश देता है और समाज को एक नई दिशा प्रदान करता है।श्री महंत दुर्गा दास जी महाराज ने गुरु और भगवान राम की अनंत महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु और ईश्वर में कोई भेद नहीं है, दोनों ही भक्त के जीवन को प्रकाशित करने वाले दिव्य स्रोत हैं। वहीं महंत बालक दास महाराज ने संत महापुरुषों की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि संतों का संग मनुष्य को ऊंचे आध्यात्मिक स्तर तक पहुंचाने का सबसे सरल मार्ग है, जिससे जीवन में सच्ची शांति और आनंद की प्राप्ति होती है
पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति रस की अविरल धारा बहती रही। भजन-कीर्तन, सत्संग और प्रवचनों के माध्यम से वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक हो गया। अंत में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें असंख्य श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य बनाया।यह पुण्यतिथि समारोह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, संतों के त्याग और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने वाला एक दिव्य उत्सव बन गया, जिसने सभी के हृदय में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का नया प्रकाश प्रज्वलित कर दिया। इस अवसर पर बोलते हुए महंत गणेश दास महाराज ने कहा जिस पर भगवान राम की अनंत कृपा हो जाए उसके भाग्य का उदय हो जाता है इस अवसर पर राजेंद्र अथवाल अध्यक्ष गौ सेवा आयोग महामंडलेश्वर ललितानंद महाराज महामंडलेश्वर श्याम दास महाराज महंत बिहारी शरण महाराज महंत सूरज दास महाराज महंत जयरामदास महाराज स्वामी अंकित शरण महाराज महंत हरेंद्र दास महाराज महंत प्रहलाद दास महाराज महंत रवि देव महाराज महंत दुर्गादास महाराज महंत बालक दास महाराज महंत प्रभु दास महाराज महामंडलेश्वर स्वामी भगवत स्वरूप महाराज महंत हरिहरानंद महाराज महंत दिनेश दास महाराज महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज जगतगुरु भाई यादरस जी महाराज महंत अरुण दास महाराज महंत वृंदावन दास महाराज महंत छोटन दास महाराज सहित कई सौ महंत महामंडलेश्वर कथा हजारों भक्त तथा संत महापुरुष इस अवसर पर उपस्थित थे भक्तों तथा संतों की भीड़ का श्याम तक आश्रम में आश्रम के आसपास श्रद्धा का सैलाब उमड़ा दिखाई दिया




