हरि नाम ही मनुष्य जीवन के कल्याण और मुक्ति का साक्षात मार्ग : मोहन शरण महाराजशिव सदन में श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन निकली पोथी शोभायात्रा, भक्तिमय हुआ वातावरण हरिद्वार
हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद। शिव सदन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पावन अवसर पर सोमवार को भव्य पोथी शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। वातावरण भगवान श्रीहरि के जयघोष और भजनों से भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने सिर पर श्रीमद्भागवत पोथी को धारण कर धर्म और आस्था के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। कथा के प्रथम दिन कथा व्यास प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान परम पूज्य श्री मोहन शरण जी महाराज जो की 18 पुराणों, के प्रबुद्ध ज्ञात है कथा व्यास परम पूज्य श्री मोहन शरण जी महाराज ने कहा श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का सुंदर वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्री हरि का नाम लेने मात्र से मनुष्य का जीवन सार्थक हो जाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन केवल सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर की भक्ति, सत्कर्म और प्रभु के स्मरण के लिए मिला है। हरि नाम ही जीवन के कल्याण की युक्ति है और यही मुक्ति का साक्षात मार्ग है। मोहन शरण जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझाती है। जब मनुष्य श्रद्धा के साथ भगवान का नाम जपता है, संतों का सानिध्य प्राप्त करता है और कथा का श्रवण करता है, तब उसके भीतर के विकार धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। प्रभु के चरणों में मन लगाने से जीवन में शांति, प्रेम, करुणा और सद्भाव का संचार होता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि अपने दैनिक जीवन में कुछ समय भगवान के नाम, भजन और सत्संग के लिए अवश्य निकालें श्रीमद् भागवत कथा साक्षात भगवान श्री कृष्ण का विग्रह है और मानव जीवन कल्याण सुधा रस इसके दूर से भी कान में श्रवण होने मात्र से मनुष्य जीवन सार्थक हो जाता है यह कथा सुख समृद्धि के साथ-साथ अपने पितरों के तर्पण हेतु की जाती है, इस कथा का आयोजन करने से घर में सुख शांति समृद्धि का वास होता है और उसके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है कथा के मुख्य यजमान भीलवाड़ा, राजस्थान से पधारे श्री महावीर सोनी एवं श्री बद्रीलाल सोनी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना जीवन का सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की पावन भूमि पर संतों के श्रीमुख से भगवान की कथा सुनना आत्मा को शांति प्रदान करता है और मनुष्य को धर्म तथा सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्री महावीर सोनी ने कहा कि भगवान का नाम मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। संसार की संपत्ति साथ नहीं जाती, लेकिन प्रभु का नाम और किए गए सत्कर्म जीवन को सच्चा अर्थ प्रदान करते हैं। श्री बद्रीलाल सोनी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को भक्ति के साथ-साथ सत्य, सेवा और सदाचार का मार्ग दिखाती है। प्रभु के चरणों में श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी आत्मिक शांति प्राप्त कर सकता है।इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत कथा के दिव्य प्रसंगों का श्रवण करते हुए भगवान श्रीहरि के जयकारे लगाए। पूरा शिव सदन परिसर ‘राधे-राधे’, ‘श्रीहरि भगवान की जय’ के जयघोष से गूंज उठा। कथा के प्रथम दिन ही भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ऐसा वातावरण निर्मित हुआ, मानो हर भक्त का मन भगवान के चरणों में समर्पित हो गया हो। इस अवसर पर श्री महावीर सोनी श्री बद्रीलाल सोनी श्री चांदमल लाठी बाहेड़िया श्री रामकृष्ण सोनी श्री बद्रीलाल सोनी विमल सोनी सुभाष सोनी आशीष सोनी शिव कुमार सोनी मितान सोनी शिवाय सोनी राघव सोनी महावीर सोनी कुलदीप सोनी रवि सोनी श्री भावेश प्रणव जी राम जानकी सोनी जी श्रीमती प्रेम देवी सोनी महावीर सोनी श्रीमती अनीता सोनी श्री बद्रीलाल सोनी श्रीमती पुष्पा देवी श्री गोपी दादा जी भीलवाड़ा श्री दिनेश शर्मा सहित भारी संख्या में राजस्थान से आए श्रद्धालु भक्तजन तथा हरिद्वार से कथा श्रवण हेतु पधारे भारी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे संपूर्ण श्रद्धा भक्ति के साथ श्रीमद् भागवत कथा की प्रथम दिन की महिमा का रसपान कर अपने मानव जीवन को धन्य तथा सार्थक किया



