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पितृ अमावस्या , मनुष्य के आत्म मंथन और आत्मबोध के साथ-साथ पितरों के प्रति समर्पण भाव का पर्व है श्री महंत विष्णु दास महाराज हरिद्वार

हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद। हिमालय डिपो गली, श्रवणनाथ नगर स्थित प्रसिद्ध श्री गुरु राम सेवक उछाली आश्रम में पितृ अमावस्या के पावन पर्व पर परमात्मा स्वरूप प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री महंत विष्णु दास जी महाराज के पतित पावन सानिध्य में विशाल संत भंडारे का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया गया। इस अवसर पर आश्रम परिसर संत-महापुरुषों के पावन सानिध्य और हरिनाम संकीर्तन से भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम में संत-महापुरुषों तथा श्रद्धालु भक्तों ने अपने पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करते हुए उनकी आत्मिक शांति एवं सद्गति की कामना की। पितृ अमावस्या को सनातन धर्म में पितरों के स्मरण, तर्पण, सेवा और दान-पुण्य का विशेष पर्व माना गया है। इस अवसर पर संत सेवा और भंडारे का आयोजन कर पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना पुण्यकारी माना जाता है। इस अवसर पर श्री महंत विष्णु दास जी महाराज ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु ही वह दिव्य शक्ति हैं जो मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर सत्य, धर्म और परमात्मा के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। गुरु की कृपा से जीवन में संस्कार, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का प्रकाश उत्पन्न होता है। गुरु के चरणों में श्रद्धा और सेवा भाव रखने वाला साधक जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की दिशा में आगे बढ़ता है। उन्होंने पितृ अमावस्या की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारे पितर हमारे जीवन और संस्कारों की आधारशिला हैं। उनके प्रति श्रद्धा, स्मरण, सेवा और दान-पुण्य भारतीय सनातन परंपरा की महान विरासत है। पितरों का स्मरण केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और उनके दिए संस्कारों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी है। संत सेवा, अन्नदान और जरूरतमंदों की सेवा के माध्यम से मानव अपने जीवन को पुण्य एवं परोपकार की भावना से जोड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जहां संतों का सत्संग, गुरु सेवा और अन्नदान होता है, वहां आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। संतों के आशीर्वाद से परिवार एवं समाज में सुख, शांति और सद्भाव की भावना मजबूत होती है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में गुरु सेवा, गौ सेवा, संत सेवा और जरूरतमंदों की सेवा को स्थान देना चाहिए। संत भंडारे में महंत सीताराम दास महाराज, महंत हरिदास महाराज, महंत प्रेमदास महाराज सहित भारी संख्या में संत-महापुरुष एवं भक्तगण उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। आश्रम परिसर में दिनभर श्रद्धा, भक्ति और सेवा का वातावरण बना रहा। आयोजन के अंत में सभी संत-महापुरुषों एवं भक्तों ने पितरों की शांति तथा समस्त विश्व के कल्याण की मंगलकामना की।

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