रुक्मणी विवाह प्रसंग ने भक्तों को किया भाव-विभोर, कथा पंडाल में गूंजे भक्ति के स्वर हरिद्वार।

हरिद्वार ज्वालापुर स्थित इन ग्रेस्ट स्कूल, रेलवे फाटक रोड, निकट पेट्रोल पंप के पास आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास परम पूज्य अभिषेक शर्मा जी के श्रीमुख से भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक श्रवण किया। कथा के दौरान रुक्मणी विवाह का मनोहारी प्रसंग सुनाया गया, जिसने उपस्थित भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। रुक्मणी विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कथा व्यास अभिषेक शर्मा जी ने बताया कि माता रुक्मणी भगवान श्रीकृष्ण को अपने आराध्य एवं पति के रूप में स्वीकार कर चुकी थीं। जब उनका विवाह किसी अन्य से कराने की तैयारी होने लगी, तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर अपनी रक्षा एवं उन्हें अपने साथ ले जाने की प्रार्थना की। भक्तवत्सल भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्त की पुकार सुनी और रुक्मणी का हरण कर उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। रुक्मणी विवाह के इस सुंदर दृष्टांत का वर्णन सुनकर कथा स्थल पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण बन गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो भक्तजन स्वयं द्वापर युग की उस दिव्य लीला के साक्षी बन गए हों। विवाह प्रसंग के दौरान श्रद्धालुओं ने हर्षोल्लास के साथ भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के जयकारे लगाए। पूरा कथा पंडाल ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंज उठा।कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी का विवाह केवल एक पौराणिक प्रसंग नहीं, बल्कि अटूट श्रद्धा, समर्पण और ईश्वर के प्रति प्रेम का प्रतीक है। जो भक्त सच्चे मन से भगवान को पुकारता है, भगवान उसकी पुकार अवश्य सुनते हैं। इस अवसर पर श्री कुलदीप मेहता, अनिरुद्ध, अनुपम रावत, आदित्य उपाध्याय, तिलक वशिष्ठ, आशुतोष, डॉ. बृजेंद्र पाल, कुलदीप, विनोद मेहता, विनय, डॉ. सुधीर अग्रवाल, डॉ. मुकेश मित्तल, विनय सीमेंट वाले मेहता जी, रुचिर खंडेलवाल, श्री निशित खंडेलवाल सहित भारी संख्या में श्रद्धालु एवं श्रोतागण उपस्थित रहे। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मणी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर रहा।

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