गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े ने , सनातन की अलख जगाने हेतु पांच महामंडलेश्वर बनाएं हरिद्वार

हरिद्वार, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद। जगजीतपुर रोड, कनखल स्थित श्री महामृत्युंजय मठ में गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े के तत्वावधान में आयोजित भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और संत-संगम का अनुपम केंद्र बना। कार्यक्रम के दौरान तत्वज्ञान, साधना और आध्यात्मिक योगदान के आधार पर पांच आध्यात्मिक विभूतियों को महामंडलेश्वर पद से विभूषित किया गया। इस अवसर पर, श्री दीपेंद्र नाथ महाराज मंजू वर्मा नाथ महाराज दीपांशु नाथ महाराज मोनिका नाथ जी महाराज को महामंडलेश्वर पद पर विभूषित किया गया संत-महापुरुषों के सान्निध्य में संपन्न इस आयोजन में सनातन धर्म की गौरवशाली परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति तथा अध्यात्म के व्यापक संदेश पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े के अध्यक्ष परम पूज्य श्री संजीवन नाथ महाराज ने कहा कि पृथ्वी लोक पर सनातन धर्म की अखंड ज्योति संत-महापुरुषों के माध्यम से ही निरंतर प्रज्वलित और संपूर्ण विश्व में प्रवाहित हो रही है। संत केवल धर्म और अध्यात्म के उपदेशक नहीं, बल्कि मानवता के मार्गदर्शक होते हैं। उनके तप, त्याग, साधना और सद्विचार समाज को संस्कार, सेवा और सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं।उन्होंने कहा कि सनातन की शक्ति उसकी प्राचीनता में ही नहीं, बल्कि उसके शाश्वत विचारों, मानव कल्याण की भावना और समस्त जीवों के प्रति करुणा में निहित है। संत परंपरा ने सदैव समाज को जोड़ने, अज्ञान का अंधकार दूर करने और आत्मिक चेतना का प्रकाश फैलाने का कार्य किया है। आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी भी संतों के विचारों और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करे। कार्यक्रम में प्रातः स्मरणीय परम पूज्य श्री महंत, श्री पंचदशनाम आह्वान अखाड़े के सचिव एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता स्वामी चेतनानंद जी महाराज ने अध्यात्म की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अध्यात्म मनुष्य को बाहरी उपलब्धियों से आगे ले जाकर उसके अंतर्मन से परिचित कराता है। संतों का जीवन त्याग, तपस्या और लोककल्याण का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जहां संतों का सान्निध्य होता है, वहां केवल धार्मिक वातावरण ही नहीं बनता, बल्कि मनुष्य के भीतर सद्भाव, संयम और सेवा की भावना भी जागृत होती है महामंडलेश्वर श्री हर्षिता जी महाराज ने कहा कि संत परंपरा भारतीय संस्कृति की आत्मा है। संतों के चरणों में बैठकर मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध होता है। उन्होंने सभी से धर्म के साथ-साथ सेवा और मानव कल्याण को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया l महामंडलेश्वर श्री अनिल कृष्ण वृंदावन वाले जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म किसी एक व्यक्ति या एक युग तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन को सत्य, प्रेम, करुणा और सदाचार से जोड़ने वाली शाश्वत परंपरा है। संत-महापुरुष इसी दिव्य परंपरा को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का महान कार्य करते हैं। योगी शंकर नाथ जी महाराज ने कहा कि गुरु की कृपा और संतों का आशीर्वाद मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का द्वार खोलता है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिक युग में संतों के विचार समाज को शांति, संयम और आत्मविश्वास प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम में उपस्थित संत-महापुरुषों ने नवविभूषित महामंडलेश्वरों को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि वे धर्म, अध्यात्म, संस्कार और मानव सेवा की भावना को जन-जन तक पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।संमहामृत्युंजय मठ में पांच आध्यात्मिक विभूतियां महामंडलेश्वर पद से विभूषित, संत-महापुरुषों ने दिया सनातन धर्म के संरक्षण का संदेशहरिद्वार। जगजीतपुर रोड, कनखल स्थित श्री महामृत्युंजय मठ में

गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े के तत्वावधान में आयोजित भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और संत-संगम का अनुपम केंद्र बना। कार्यक्रम के दौरान तत्वज्ञान, साधना और आध्यात्मिक योगदान के आधार पर पांच आध्यात्मिक विभूतियों को महामंडलेश्वर पद से विभूषित किया गया। संत-महापुरुषों के सान्निध्य में संपन्न इस आयोजन में सनातन धर्म की गौरवशाली परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति तथा अध्यात्म के व्यापक संदेश पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।

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