श्रीमद्भागवत कथा के अमृत रस में सराबोर हुए श्रद्धालु, ध्रुव चरित्र ने दिया अटूट भक्ति का संदेश हरिद्वार।

धर्मनगरी हरिद्वार , वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोज मनोजानंद भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध ललिता आश्रम ट्रस्ट में आयोजित मानव कल्याणकारी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। प्रातः स्मरणीय कथा व्यास पं श्रीराम प्रपन्नाचार्य महाराज, श्रीधाम वृंदावन के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही श्रीमद्भागवत कथा का अमृतपान कर हजारों श्रद्धालु अपने जीवन को धन्य एवं सार्थक बना रहे हैं। कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर भगवान की दिव्य लीलाओं का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कर रहे हैं। कथा के प्रथम दिवस पर व्यासपीठ से पूज्य महाराज श्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि कलियुग में भगवान की कथा ही जीव मात्र के कल्याण का सर्वोत्तम साधन है। श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य माध्यम है। कथा श्रवण से मनुष्य के भीतर छिपे विकार समाप्त होते हैं तथा उसके जीवन में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उदय होता है। अपने भावपूर्ण प्रवचन में उन्होंने ध्रुव जी के चरित्र का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बालक ध्रुव ने मात्र पांच वर्ष की आयु में अपमान और उपेक्षा को अपने जीवन की कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे भगवान की प्राप्ति का माध्यम बना लिया। माता सुनीति के संस्कारों से प्रेरित होकर ध्रुव वन में चले गए और कठोर तपस्या के माध्यम से भगवान श्रीहरि को प्रसन्न कर लिया। उनकी अटूट श्रद्धा, दृढ़ संकल्प और निष्काम भक्ति ने उन्हें वह स्थान प्रदान किया, जो आज ध्रुव तारे के रूप में संपूर्ण विश्व के लिए स्थिरता और अटल विश्वास का प्रतीक बना हुआ है। कथा व्यास ने कहा कि ध्रुव चरित्र हमें सिखाता है कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, यदि मनुष्य के हृदय में भगवान के प्रति सच्ची आस्था और दृढ़ विश्वास हो तो वह असंभव को भी संभव बना सकता है। भगवान अपने भक्तों के प्रेम के वशीभूत होकर स्वयं उनकी रक्षा और कल्याण करते हैं। ध्रुव की कथा प्रत्येक बालक, युवा और गृहस्थ के लिए प्रेरणा का स्रोत है।उन्होंने आगे कहा कि आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में मानसिक शांति खोता जा रहा है। ऐसे समय में श्रीमद्भागवत कथा जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। कथा का प्रत्येक प्रसंग मानवता, करुणा, सेवा, त्याग और ईश्वर भक्ति का संदेश देता है। जब मनुष्य भगवान के नाम और कथा से जुड़ता है, तब उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आने लगते हैं। कथा के दौरान संपूर्ण पंडाल “राधे-राधे”, “जय श्रीकृष्ण” और “हरि बोल” के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु कथा श्रवण करते हुए भक्ति भाव में डूब गए तथा अनेक भक्तों की आंखें भगवान की लीलाओं का वर्णन सुनकर भावविभोर हो उठीं। भजन-कीर्तन और संकीर्तन के माध्यम से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बना रहा। आश्रम प्रबंधन ने बताया कि कथा महायज्ञ का आयोजन मानव कल्याण, विश्व शांति तथा समाज में आध्यात्मिक जागृति के उद्देश्य से किया जा रहा है। कथा के आगामी दिनों में भगवान की विभिन्न दिव्य लीलाओं एवं भक्तों के चरित्रों का वर्णन किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सदाचार का अमूल्य मार्गदर्शन प्राप्त होगा। श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना का ऐसा दीप प्रज्ज्वलित किया, जिसकी दिव्य आभा लंबे समय तक उनके जीवन को आलोकित करती रहेगी।



